सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल: सेवानिवृत्त इंजीनियर रमेश गेरा ने दिखाया है कि तकनीक की मदद से कश्मीर के परंपरागत केसर क्षेत्रों से दूर, नोएडा के एक नियंत्रित कमरे में भी केसर की खेती की जा सकती है। उनका यह प्रयोग आगे चलकर इनडोर फार्मिंग उद्यम और प्रशिक्षण पहल के रूप में विकसित हुआ है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों में करीब 35 वर्ष तक इंजीनियर के रूप में काम कर चुके गेरा ने 2018 से 2020 के बीच घर के भीतर केसर उगाने पर प्रयोग शुरू किए। शुरुआती वर्षों में कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने अपनी तकनीक में लगातार बदलाव किए और आखिरकार सफल परिणाम हासिल किए। इस दौरान उन्होंने कश्मीर के कृषि विशेषज्ञों से तकनीकी सुझाव भी लिए।
उनकी पद्धति में केसर के कॉर्म को बंद, बिना मिट्टी वाले वातावरण में रैक पर उगाया जाता है। फसल के लिए जरूरी स्थितियां बनाने के लिए तापमान, नमी और रोशनी को सावधानी से नियंत्रित किया जाता है। इसकी बढ़वार का चक्र लगभग तीन महीने का होता है और कटाई आम तौर पर नवंबर के आसपास की जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, गेरा ने चिलिंग सिस्टम, ह्यूमिडिफायर, रैक और केसर कॉर्म सहित उपकरणों पर करीब ₹6 लाख का निवेश किया। बताया गया है कि उनका सेटअप प्रति माह ₹3.5 लाख तक का राजस्व दे सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसी आय उपज, उपकरण, बिजली खर्च और बाजार भाव के आधार पर काफी बदल सकती है।
उनका काम अब प्रशिक्षण तक फैल चुका है, जिसके जरिए यह दिखाया जा रहा है कि नियंत्रित वातावरण वाली खेती उन जगहों पर भी खेती के अवसर बना सकती है, जहां पारंपरिक कृषि भूमि सीमित है।
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