CNN Central News & Network–ITDC India ePress/ITDC News भोपाल: इंडियन नेशनल कांग्रेस से अलग होने के वर्षों बाद भी सुष्मिता देव की राजनीतिक यात्रा लगातार ध्यान आकर्षित कर रही है। विश्लेषकों की नजर में उनका यह कदम महज एक सामान्य राजनीतिक इस्तीफा नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक महत्व रखने वाला फैसला था। राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वालीं और पूर्वोत्तर से कांग्रेस की प्रमुख आवाजों में शामिल सुष्मिता देव ने 2021 में पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हुईं, जहां बाद में वह राज्यसभा सदस्य भी बनीं।
उनके बाहर जाने को पूर्वोत्तर में कांग्रेस के लिए झटका माना गया, खासकर असम और पड़ोसी राज्यों में, जहां उन्होंने मजबूत राजनीतिक मौजूदगी बनाई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की पुत्री सुष्मिता देव सिलचर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और महिलाओं के अधिकार, क्षेत्रीय विकास तथा अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए जानी जाती रही हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उनका यह फैसला बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रभावशाली क्षेत्रीय नेताओं को अपने साथ बनाए रखने में कांग्रेस के सामने मौजूद व्यापक चुनौतियों को भी दर्शाता है। उनके इस कदम से पश्चिम बंगाल से बाहर विस्तार करने और पूर्वोत्तर में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की TMC की कोशिशों को भी बल मिला।
वर्तमान में सुष्मिता देव क्षेत्र में TMC के प्रमुख चेहरों में बनी हुई हैं और पार्टी की राष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने की रणनीति में अहम भूमिका निभा रही हैं। कांग्रेस की निष्ठावान नेता से TMC की प्रमुख सांसद तक का उनका सफर आज भी समकालीन भारतीय राजनीति और पूर्वोत्तर के बदलते राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
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