सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / नई दिल्ली : इस साल चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गए हैं। सिर्फ 10 महीनों में चांदी का भाव ₹86,000 प्रति किलो से बढ़कर ₹1.75 लाख प्रति किलो हो गया है, यानी यह दोगुना से भी ज्यादा हो गया। इसके कारण चांदी ने सोने के मुकाबले 37% ज्यादा रिटर्न दिया है। इस तेजी के कारण निवेशकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चांदी में अभी निवेश करना सही है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमत बढ़ने के कई कारण हैं। फेस्टिव सीजन में भारत में चांदी की मांग बढ़ जाती है, खासकर दिवाली-धनतेरस के दौरान। इंडस्ट्रियल डिमांड भी बढ़ रही है, क्योंकि सोलर फैक्ट्रियों, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और एआई इंडस्ट्री में चांदी की खपत तेजी से बढ़ रही है। दूसरी ओर, सप्लाई में कमी है, क्योंकि खदानें पर्यावरण नियमों और अन्य कारणों से कम उत्पादन कर रही हैं। निवेश के लिए तीन मुख्य तरीके हैं। पहला, फिजिकल सिल्वर यानी चांदी के सिक्के या बार। इसमें बीआईएस हॉलमार्केड चांदी ही खरीदना चाहिए। दूसरा, सिल्वर ईटीएफ, जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं और डिमैट अकाउंट से खरीदे जा सकते हैं। तीसरा, सिल्वर फ्यूचर्स, जिसमें कम पैसे लगाकर मार्जिन के साथ ज्यादा चांदी खरीद या बेची जा सकती है, लेकिन इसमें जोखिम अधिक है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि शॉर्ट टर्म में आक्रामक निवेश से बचना चाहिए। गिरावट के मौके पर ही चांदी में निवेश करना लाभकारी रहेगा। लंबी अवधि में, सोने की तुलना में चांदी अधिक तेजी से बढ़ सकती है और आकर्षक रिटर्न दे सकती है।
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