सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दिल्ली के छात्र केंद्रों में असुरक्षित आवास को लेकर चिंता बढ़ रही है। कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों के नजदीक रहने के लिए हजारों छात्र ऊंचा किराया चुका रहे हैं। सत्य निकेतन में हालिया इमारत ढहने की घटना ने घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों में रह रहे छात्रों के जोखिम को फिर सामने ला दिया है।
लक्ष्मी नगर, शकरपुर, वेस्ट अंगद नगर, मुखर्जी नगर, विजय नगर और गुरु मंडी जैसे इलाकों में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास निजी आवास तेजी से बढ़े हैं। लेकिन कई इमारतों में तंग कमरे, संकरी सीढ़ियां, खराब वेंटिलेशन, खुले बिजली के तार और आग से बचाव के अपर्याप्त इंतजाम बताए जाते हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि सीमित जगह और कमजोर बुनियादी सुविधाओं के बावजूद वे डबल-शेयरिंग आवास के लिए 10,000 रुपये से 16,000 रुपये तक किराया दे रहे हैं।
चिंता इसलिए भी बढ़ती है क्योंकि कई संपत्तियां आवासीय इमारतों के भीतर व्यावसायिक पेइंग-गेस्ट सुविधा के रूप में चल रही हैं, जिससे अनुमति और सुरक्षा अनुपालन पर सवाल उठते हैं। संकरी और क्षतिग्रस्त सड़कें आपात सेवाओं के लिए इन जगहों तक जल्दी पहुंचना भी मुश्किल बना सकती हैं। मुखर्जी नगर में कोचिंग सेंटर में लगी आग और लक्ष्मी नगर में ट्रांसफॉर्मर आग जैसी पिछली घटनाएं ऐसे घनी आबादी वाले इलाकों के खतरे दिखा चुकी हैं।
यह स्थिति दिल्ली में छात्र आवासों के लिए कड़ी जांच, अग्नि-सुरक्षा नियमों के पालन और सुरक्षित व्यवस्था की तत्काल जरूरत को रेखांकित करती है।
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