सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को 29 सप्ताह के गर्भपात की अनुमति दी

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को 29 सप्ताह के गर्भ का चिकित्सकीय समापन कराने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि गर्भपात से जुड़े मामलों में निर्णय केवल 24 सप्ताह की कानूनी समय-सीमा के आधार पर नहीं लिया जा सकता। प्रत्येक मामले में गर्भवती की उम्र, गर्भधारण की परिस्थितियों, चिकित्सकीय राय और उसके अधिकारों व हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर ने 24 अक्टूबर को यह आदेश नाबालिग की ओर से उसकी दादी के माध्यम से दायर याचिका पर सुनाया। याचिका में कहा गया था कि गर्भ दुष्कर्म की घटना के कारण ठहरा है और इसे जारी रखने से किशोरी को गंभीर मानसिक आघात तथा मनोवैज्ञानिक परेशानी हो सकती है। इस मामले में दिल्ली के ख्याला थाने में प्राथमिकी भी दर्ज है।

चिकित्सकीय रिपोर्ट को बनाया आधार

अदालत ने दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार किया। बोर्ड ने किशोरी को गर्भसमापन की प्रक्रिया के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से उपयुक्त बताया था। इसके बाद अदालत ने सक्षम चिकित्सकों की टीम को लागू कानून और चिकित्सा दिशानिर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।

अदालत ने भ्रूण के ऊतकों को डीएनए जांच के लिए सुरक्षित रखने को भी कहा, ताकि आपराधिक मामले की जांच में आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सके। गर्भसमापन, अस्पताल में रहने और ऑपरेशन के बाद की देखभाल का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने के निर्देश

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि प्रक्रिया के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो अस्पताल और राज्य प्रशासन उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसी स्थिति में बाल कल्याण समिति को सूचित किया जाएगा। अदालत ने नाबालिग पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया।

यह फैसला प्रजनन संबंधी स्वायत्तता, गरिमा और नाबालिग पीड़िताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।


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