सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : BRICS Summit में पश्चिमी दबदबे पर नई बहस
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर वैश्विक राजनीति में चर्चा तेज है। इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब BRICS का विस्तार हो चुका है और समूह के भीतर आर्थिक तथा रणनीतिक हित पहले की तुलना में अधिक विविध हो गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने से ज्यादा अपने सदस्यों के बीच सहमति बनाए रखना है।
BRICS के कुछ सदस्य इसे वैश्विक व्यवस्था में अमेरिकी और पश्चिमी प्रभाव का विकल्प बनाने की दिशा में देख रहे हैं। वहीं भारत का रुख अपेक्षाकृत संतुलित है। नई दिल्ली BRICS को किसी एंटी-वेस्ट गठबंधन के बजाय ग्लोबल साउथ की आवाज और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार के मंच के रूप में मजबूत करना चाहती है।
समूह के भीतर मतभेद भी चुनौती बने हुए हैं। पश्चिम एशिया संकट जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के अलग-अलग रुख के कारण पहले ही संयुक्त बयान पर सहमति बनाने में कठिनाई सामने आ चुकी है। भारत के लिए सम्मेलन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन मतभेदों के बीच साझा एजेंडा कितना मजबूत कर पाता है।
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