सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल: बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण की पीठ ने 2021 के एंटीलिया बम धमकी और मनसुख हिरन हत्या मामले में मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी सचिन वाजे को मिली जमानत के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील सुनने से खुद को अलग कर लिया। मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया।
न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा कि वह वाजे से जुड़ी एक अलग कार्यवाही से पहले ही खुद को अलग कर चुकी हैं। वहीं न्यायमूर्ति चव्हाण ने बताया कि वह इससे जुड़े एक अलग मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से वकील के रूप में पेश हो चुके हैं। इस आधार पर पीठ ने NIA की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
इससे एक दिन पहले न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति आर.आर. भोसले की बॉम्बे हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ भी इस मामले से अलग हो गई थी। NIA ने विशेष NIA अदालत द्वारा 29 सितंबर को वाजे को जमानत दिए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था।
बाद में 30 सितंबर को न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला के. गोखले की तीसरी पीठ ने NIA की अपील पर सुनवाई की और वाजे की जमानत आदेश पर 7 अक्टूबर तक एड-इंटरिम रोक लगा दी। इसके चलते हाईकोर्ट में NIA की चुनौती पर विचार जारी रहने के दौरान वाजे हिरासत में रहे।
विशेष अदालत ने वाजे को जमानत देते हुए कहा था कि उसके सामने मौजूद सामग्री से प्रथमदृष्टया यह स्थापित नहीं होता कि कथित अपराध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आतंकवादी कृत्य है। NIA ने इस आकलन को चुनौती देते हुए कहा है कि जमानत आदेश कानून और तथ्यों, दोनों आधारों पर त्रुटिपूर्ण है।
मामला फरवरी 2021 का है, जब मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास जिलेटिन स्टिक और धमकी भरे पत्र से भरी एक SUV मिली थी। वाहन से जुड़े कारोबारी मनसुख हिरन बाद में ठाणे की एक खाड़ी में मृत पाए गए थे। NIA ने मार्च 2021 में वाजे को गिरफ्तार किया था और वह इस मामले में हिरासत में रहे हैं।
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