सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पुणे के मुंढवा स्थित सरकारी जमीन से जुड़े अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पार्थ पवार को आरोपी नहीं बनाए जाने को लेकर जांच पर सवाल उठाए हैं। 1 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने जांच अधिकारी के हलफनामे पर टिप्पणी करते हुए पूछा कि कंपनी में 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्ति को जांच में जिम्मेदार क्यों नहीं माना गया, जबकि एक प्रतिशत हिस्सेदारी वाले व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है।
अदालत ने यह भी सवाल किया कि यदि 40 एकड़ सरकारी जमीन का सौदा सफल होता, तो इसका लाभ किसे मिलता। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने कहा कि यह एक एलएलपी है और लाभ कंपनी को मिलता। इस पर अदालत ने पूछा कि कंपनी में 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्ति को लाभ नहीं मिलता या केवल एक प्रतिशत हिस्सेदारी वाले व्यक्ति को मिलता।
मामले में पुणे के निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई हुई। अदालत ने उनके खिलाफ किसी व्यक्ति को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए आदेश देने का विशिष्ट आरोप नहीं पाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक ने अदालत को बताया कि पुणे पुलिस मामले की आगे विस्तृत और पेशेवर तरीके से जांच करेगी।
इससे पहले सितंबर में भी हाईकोर्ट ने पुलिस से पार्थ पवार को आरोपी नहीं बनाए जाने का कारण बताने को कहा था। मामले में अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी द्वारा पुणे के मुंढवा क्षेत्र में 40 एकड़ सरकारी जमीन के कथित कम कीमत पर सौदे की जांच चल रही है।
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