आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : डायबिटीज (मधुमेह या शुगर) के मरीजों के लिए म्यूजिक सुनना फायदेमंद हो सकता है। रिसर्चर्स का कहना है कि म्यूजिक से शरीर की कोशिकाएं कुछ ही मिनटों में इन्सुलिन रिलीज कर सकती हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डायबिटीज में शरीर के पैन्क्रियाज में इन्सुलिन की कमी हो जाती है यानी पैन्क्रियाज में इन्सुलिन बनाने की क्षमता घट जाती है। इससे खून में ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा हो जाती है।

इन्सुलिन की बात करें, तो यह एक तरह का हार्मोन होता है। ये शरीर के अंदर डायजेस्टिव ग्लैंड से बनता है। इसका काम खाने को एनर्जी में बदलना होता है। जब ये नैचुरली प्रोड्यूस होने बंद हो जाता है तो इंजेक्शन के जरिए इसे डायबिटीज के मरीजों को दिया जाता है।

शरीर में इन्सुलिन प्रोड्यूसिंग सेल इंप्लांट, ये म्यूजिक से ट्रिगर होती हैं

रिसर्चर्स हमेशा से शरीर में नैचुरली इन्सुलिन प्रोड्यूस करने के तरीके ढूंढते आए हैं। उनकी तलाश इन्सुलिन प्रोड्यूसिंग सेल के कैप्सूल पर आकर रुकी। दरअसल, इन्सुलिन बनाने वाली डिजाइनर सेल्स को एक कैप्सूल में रखा जाता है। इसके बाद इस कैप्सूल को शरीर में इंप्लांट किया जाता है। इसे बाहरी तौर पर कंट्रोल किया जा सकता है।

आसान शब्दों में कहें तो इन्सुलिन को कब और कितनी मात्रा में रिलीज करना है, ये आप खुद तय कर सकते हैं। स्विट्जरलैंड के रिसर्चर्स ने इन्सुलिन रिलीज करने वाले या इन्सुलिन को ट्रिगर करने के तरीकों को स्टडी किया है। उनके मुताबिक, लाइट, टेम्परेचर, इलेक्ट्रिक फील्ड से इन्सुलिन रिलीज हो सकता है।

इसके अलावा म्यूजिक से भी कुछ ही मिनटों में इन्सुलिन रिलीज हो सकता है। रिसर्चर्स के इसका पहला सबूत रॉक म्यूजिक के जरिए मिला। एक एक्सपेरिमेंट के दौरान उन्होंने मशहूर ब्रिटिश रॉक बैंड ‘क्वीन’ का फेमस गाना ‘वी विल रॉक यू’ बजाया। इसके 5 मिनट बाद ही इन्सुलिन प्रोड्यूसिंग सेल से 70% इन्सुलिन रिलीज हुआ। 15 मिनट बाद इन्सुलिन पूरी तरह से रिलीज हो गया।

रिसर्चर्स के मुताबिक, क्लासीकल म्यूजिक या गिटार की धुन की तुलना में इन्सुलिन रॉक म्यूजिक से ज्यादा ट्रिगर होती है। ‘द एवेंजर्स’ मूवी के टाइटिल ट्रैक पर भी इन्सुलिन ज्यादा मात्रा में रिलीज हुई। इसका मतलब ये हुआ कि हाई पिच वाला म्यूजिक इन्सुलिन को ज्यादा मात्रा में रिलीज करता है।

अब सवाल ये उठता है कि पैन्क्रियाज या कहें हमारा शरीर साउंड को रिसीव करके उन्हें इन्सुलिन में तब्दील कैसे करता है। दूसरे शब्दों में कहें तो म्यूजिक का असर सेल पर कैसे हुआ। आइए इसका जवाब जानते हैं…

इन्सुलिन प्रोड्यूसिंग सेल साउंड वेव को रिसीव कर सके इसके लिए रिसर्चर्स ने एक खास तरह के प्रोटीन का इस्तेमाल किया। रिसर्चर्स ने इसके लिए बैक्ट्रियम E. coli से एक प्रोटीन निकाला। ये प्रोटीन एक तरह की मैकेनिकल प्रोसेस है जो जानवरों में भी बैक्टीरिया के जरिए होती है। यह प्रोटीन हमारे शरीर के मेम्ब्रेंस में पाई जाती है। यही कोशिकाओं के अंदर कैल्शियम के कणों को बढ़ाते हैं। इसकी वजह से हड्डियां मजबूत रहती हैं और जोड़ सही तरह से काम करते हैं।

रिसर्चर्स ने इसी आधार पर इंसान में इन्सुलिन प्रोड्यूसिंग का तरीका ईजाद किया। इन्हीं सेल्स के माध्यम से इन्सुलिन मेम्ब्रेंस वाले उस हिस्से तक पहुंचता है, जहां से इसे पैन्क्रियाज वाले हिस्सा तक पहुंचना होता है। म्यूजिक थैरेपी से यह पता लगा कि ये सेल्स साउंड सुनने के बाद किस तरह रिस्पॉन्स करता है।

दरअसल, इस तरीके से वैसल्स में मौजूद इन्सुलिन के छोटे कण धीरे-धीरे नसों में आगे बढ़ते हैं और इन्सुलिन को बाहर की तरफ निकालते हैं। बाद में यही इन्सुलिन शरीर में ग्लूकोज के लेवल को भी एडजस्ट करता है और इस तरह डायबिटीज के पेशेंट को इन्सुलिन लेवल मेंटेन करने में मददगार साबित होता है।

शोरगुल से इन्सुलिन रिलीज नहीं हुआ

रिसर्चर्स के मुताबिक, तेज आवाज या हाई पिच वाली हर आवाज से इन्सुलिन रिलीज नहीं होता। एक्सपेरिमेंट के दौरान एयरक्राफ्ट की आवाज, फायर ब्रिगेड के सायरन, ऊंची आवाज में बातचीत करने से इन्सुलिन रिलीज नहीं हुआ।