आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पर्यावरण दिवस के अवसर पर हैल्पबॉक्स फाउंडेशन की ओर से ‘वसुधा पर्यावरण सम्मान एवं व्याख्यान’ का आयोजन किया गया। इस वर्ष वसुधा सम्मान महाविद्यालयों के अंतर्गत छात्र समूहों द्वारा किए गए उत्कृष्ट पर्यावरण एवं स्वच्छता कार्यों के लिए दिए गए। इस अवसर पर पर्यावरण कार्यों एवं नवाचारों पर आधारित पुस्तिका ‘वसुधा-2023’ का विमोचन भी किया गया।
एक सादगीपूर्ण समारोह में महाविद्यालय समूहों द्वारा किए गए पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, नो-पॉलिथीन ड्राईव, प्लॉग रन, थ्री-आर, कचरे का सेग्रीगेशन आदि कार्यों के आधार पर कैरियर कॉलेज, उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, वी.एन.एस. ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन तथा आई-सेक्ट प्रधानमंत्री कौशल केन्द्र को वसुधा सम्मान से सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में उत्कृष्ट पर्यावरण रिपोर्टिंग पर दैनिक भास्कर के ज़ाहिद मीर तथा हरिभूमि की संवाददाता मधुरिमा राजपाल और पर्यावरण चित्रकार सुषमा श्रीवास्तव को भी वसुधा सम्मान से अलंकृत किया गया।
प्रमुख अतिथि के रूप में मनोज कुमार शर्मा प्रभारी क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से जो पर्यावरण संरक्षण के कार्य हो रहे हैं वो बहुत मायने रखते हैं और इन सम्मिलित प्रयासों से धीरे-धीरे बड़ा परिवर्तन होता है।
इस अवसर पर ‘भोपाल के जल स्त्रोत – उपयोग एवं प्रबंधन’ विषय पर प्रदीप नंदी, डायरेक्टर जनरल, नेशनल सेंटर फॉर ह्यूमन सेटलमेंटस एण्ड इनवायरमेंट का व्याख्यान आयोजित हुआ। प्रदीप नंदी ने कहा की एक समय था जब बड़े तालाब का पानी इतना शुद्ध था की उसे सीधा पीने में प्रयोग किया जाता था। आज उसमे शहर का सीवेज मिलने से मेटल की मात्रा बढ़ जाती है और पानी में आक्सीजन लेवल कम होता है। छोटे और बड़े तालाब को मिलाकर 2003 में इसे रामसर साईट घोषित किया गया क्योंकि यहाँ विभिन्न प्रजाति के पक्षियों का बहुत बड़ा जमावड़ा होता है। 1988 में भोज वेट लैंड घोषित किया गया तथा ‘सरोवर हमारे धरोहर’ योजना प्रारंभ हुई किन्तु इस योजना का बड़े तालाब की सेहत पर ज्यादा असर नहीं हुआ। छोटे तालाब की स्थिति तो बहुत ही ख़राब है। भोपाल के जल स्त्रोतों का समय रहते संरक्षण ज़रूरी है।
कार्यक्रम में वसुधा पत्रिका में प्रकाशित पर्यावरण कहानियों के किरदारों का पर्यावरण योद्धा के रूप में अभिनन्दन किया गया।