आजादी के 75 साल में से 58 साल 1 ट्रिलियन डॉलर की GDP के लिए लगे। 12 साल में ट्रिलियन और सिर्फ 5 और सालों में 3 ट्रिलियन। लेकिन अब हम जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, मुझे लगता है कि अगले दशक में हर 12 से 18 महीनों में हम GDP में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ेंगे। 2050 तक भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। अडाणी ग्रुप के मालिक गौतम अडाणी ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में ये बात कही हैं।

गोतम अडाणी की जबरदस्त कामयाबी पर आलोचक कहते रहे हैं कि ये सब कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से है। इसका भी उन्होंने इंटरव्यू में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पीएम नहीं, सरकारों का नीति बदलाव कामयाबी का कारण है। उन्होंने ये भी कहा कि राजीव गांधी जब पीएम थे तो उनके करियर की शुरुआत हुई। अगर वो न होते तो मेरी शुरुआत ऐसी न होती। वहीं उन्होंने विरोध को लोकतंत्र का हिस्सा बताया। और क्या कहा अडाणी ने आइए जानते हैं…

2023 की मंदी का भारत पर असर नहीं

कई एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि साल 2023 में ग्लोबल मंदी आएगी। इसे लेकर अडाणी ने कहा, ‘मैं बहुत आशावादी हूं और कभी उम्मीद नहीं छोड़ता। पहले भी 2008 में बहुत सारे लोगों ने मंदी के दौरान भारत में आर्थिक संकट की बात कही थी, पर भारत ने इसे गलत साबित किया। मैं आशा करता हूं कि अगला बजट कैपिटल ऐक्सपैंडिचर, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देगा। ये भारत को ग्लोबल हेंडविंड से बचाने में मदद करेगा।

NDTV मैनेजमेंट और एडिटोरियल के बीच लक्ष्मण रेखा NDTV के अधिग्रहण पर अडाणी ने कहा, ‘मेरी कंपनियां प्रोफेशनल लोगों के हाथ में है और वह कंपनी को रोजाना के कामों में कोई दखल नहीं देते हैं। NDTV एक विश्वसनीय, स्वतंत्र, वैश्विक नेटवर्क होगा, जिसमें मैनेजमेंट और एडिटोरियल के बीच एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा होगी। आप अंतहीन बहस कर सकते हैं और मैं जो कह रहा हूं उसके एक-एक शब्द की व्याख्या कर सकता हूं, जैसा कि बहुत से लोगों ने किया है। हमें जज करने से पहले थोड़ा समय दें।’

ये इंटरव्यू NDTV के फाउंडर प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के हाल के उस फैसले के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अडाणी ग्रुप को अपनी शेष 32.26% हिस्सेदारी का 27.26% बेच देंगे। इससे अडाणी ग्रुप के पास हिस्सेदारी बढ़कर 64.72% हो जाएगी, जो अभी 37.45% है। रॉय परिवार ने 29 नवंबर को NDTV प्रमोटर RRPR के बोर्ड के डायरेक्टर पद से भी इस्तीफा दे दिया था।

9 सालों में मुनाफा, कर्ज से दोगुना तेजी से बढ़ा

अडाणी ग्रुप पर करीब 2 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। इसे लेकर अडाणी ने कहा, ‘हम तो आर्थिक स्तर पर बेहद मजबूत और सुरक्षित हैं। ये बातें दो तरह के लोग कह रहे हैं। पहले वो जो हमारी आर्थिक स्थिति और कर्ज की विस्तृत जानकारी नहीं रखते। अगर वो इन चीजों को समझ लेंगे तो कर्ज को लेकर उनकी गलतफहमी दूर हो जाएगी। एक और तरह के स्वार्थी लोग भी हैं, जो जबरदस्ती का भ्रम फैला रहे हैं।’

अडाणी ने कहा, ‘हकीकत ये है कि पिछले नौ सालों के दौरान हमारा मुनाफा, हमारे कर्ज से दोगुना तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह से हमारा डेब्ट-टु-Ebitda रेश्यो 7.6 से घटकर 3.2 पर आ गया है। ये एक बड़े ग्रुप के लिए बहुत ही अच्छी बात है।’ आज अडाणी ग्रुप का कारोबार एनर्जी, पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, माइनिंग, गैस, डिफेंस एवं एयरोस्पेस और एयरपोर्ट जैसे विविध क्षेत्रों तक फैला है।

पीएम नहीं, सरकारों का नीति बदलाव कामयाबी का कारण

गोतम अडाणी की जबरदस्त कामयाबी पर आलोचक कहते रहे हैं कि ये सब कुछ पीएम मोदी की वजह से है। इसे लेकर उन्होंने कहा, ‘पीएम और मैं एक ही प्रदेश से आते हैं, इसलिए मुझपर ऐसे आरोप लगाना आसान हो जाता है। मैं अपने औद्योगिक सफर को 4 भागों में बांट सकता हूं। राजीव गांधी जब पीएम थे तब मेरा सफर शुरू हुआ। जब उन्होंने एग्जिम पॉलिसी को बढ़ावा दिया तो मेरा एक्सपोर्ट हाउस शुरू हुआ। अगर वो न होते तो मेरी शुरुआत ऐसी न होती।

दूसरा मौका 1991 में आया जब प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और फाइनेंस मिनिस्टर मनमोहन सिंह ने आर्थिक सुधार शुरू किए। मेरे साथ बहुत लोगों को इसका फायदा हुआ। तीसरा मौका 1995 में आया जब केशुभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री बने। तब तक सिर्फ मुंबई से दिल्ली तक का एनएच-8 ही विकसित हुआ था, उनकी दूरदर्शिता और पॉलिसी के बदलाव से मुझे मुंद्रा पर अपना पहला पोर्ट बनाने का मौका मिला।

चौथा मौका 2001 में आया जब गुजरात में सीएम नरेंद्र मोदी ने विकास की दिशा दिखाई। उनकी नीतियों से गुजरात में आर्थिक बदलाव के साथ अविकसित क्षेत्रों का विकास हुआ। उससे उद्योग और रोजगार बढ़ा। आज पीएम मोदी वही चीज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे खिलाफ ऐसा बोला जाता है। हमारी सफलता किसी एक की वजह से नहीं पर 3 दशकों में कई सरकारों की नीति बदलाव की वजह से है।’

विरोध लोकतंत्र का ही हिस्सा

ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के साथ कुछ राज्यों में उनके कारोबार के विरोध पर अडाणी ने कहा, ‘विरोध लोकतंत्र का ही हिस्सा है। मैं ये मानता हूं कि हमारे देश के लोकतंत्र ने हम सबको आर्थिक आजादी और अवसर दिए हैं। अब हम अपने फायदे के हिसाब से शिकायत और अवसरवाद नहीं कर सकते। हम इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में हैं, जो सबसे मुश्किल कामों में से एक है। मैं आलोचना को गलत नहीं मानता हूं। मैं हमेशा सामने वाले का पक्ष समझने की कोशिश करता हूं। मैं ये भी मानता हूं कि मैं हमेशा सही नहीं हूं। मैं हर आलोचना में सुधार का मौका ढूंढता हूं।’