आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) भोपाल ने नेक्स्ट जेनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम (एनजीआईएस) चुनौती 5.0 स्टार्ट अप चैलेंज के लिए नव उद्यमियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक आउटरीच सेमिनार का आयोजन, राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल में किया। पूरे भारत में 13 टियर- III / टियर- IV स्थानों में काम कर रहे स्थानीय स्टार्ट अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एनजीआईएस योजना की अवधारणा की गई है और इस योजना के कार्यान्वयन के लिए भोपाल को एक स्थान के रूप में चुना गया है।
आउटरीच सेमिनार में मुख्य भाषण देते हुए, कुलपति राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रोफेसर सुनील कुमार ने स्टार्ट अप और इनोवेटर्स से इस एनजीआईएस चुनौती “चुनौती 5.0” में भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिभागियों को एनजीआईएस चुनौती 5.0 से लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया क्योंकि एसटीपीआई के सहयोग से उत्कृष्ट मेंटरिंग , मार्किट कनेक्ट , पेटेंट में सहायता जैसी अनेको सुविधाएं है जो की एक सफल उद्यमी बनने में मदद करेगा। उन्होंने आगे कहा कि एनजीआईएस चुनौती स्कीम के तहत वो सारे सहायता और समर्थन है, जो एक उभरते हुए उद्यमी को पोषित करने के लिए आवश्यक हैं |
एनजीआईएसचुनौती 5.0 योजना की प्रस्तुति में अब्बास मेहदी, अपर निदेशक और प्रभारी अधिकारी भोपाल ने स्टार्ट अप इको सिस्टम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बताया और उन्होंने एनजीआईएस चुनौती के पहले चरण से चौथे चरण तक के दौरान प्रतिभागियों में देखे गए उत्साह के बारे में विस्तार से बताया और हाल ही में लॉन्च किए गए एनजीआईएस चुनौती 5.0 में नव उद्यमियों भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि एनजीआईएस एक भविष्यगामी योजना है जो विभिन्न एसटीपीआई केंद्रों से प्रौद्योगिकी स्टार्ट अप को व्यापक समर्थन और लाभ प्रदान करती है।
अभिषेक कुलश्रेष्ठ, पार्टनेट, फ्लेयरसॉफ्ट कंसल्टिंगग्रुप, भोपाल जो राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भूतपूर्व छात्र रह चुके है अपनी यात्रा जब वो एक छात्र थे तबसे अब तक के बारे में बताया और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और वह किस तरह से उन्होंने कैसे समाधान खोजा। उन्होंने बताया कि फंडिंग की तुलना में सही सलाह अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और किसी भी स्टार्ट अपके लिए उन सलाहकारों के मार्गदर्शन और समर्थन के बिना सफल होना बेहद मुश्किल है, जिन्होंने खुद इन चुनौतियों का सामना किया है और बाहर आए हैं।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्टार्ट अप, उद्यमी, शिक्षाविद, शोधकर्ता और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।