आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हिमाचल से पहाड़ों पर मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। पिछले सात दिनों के दौरान नॉर्मल से 83 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अमूमन 28 अगस्त से 3 सितंबर के बीच में 38.4 मिलीमीटर नॉर्मल बारिश होती है, लेकिन इस बार मात्र 6.7 मिलीमीटर मेघ बरसे हैं। प्रदेशवासियों ने इससे राहत की सांस ली है। बारिश न होने से पहाड़ों पर जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है।
सिरमौर और लाहौल स्पीति जिले में सात दिनों के दौरान पानी की बूंद तक नहीं गिरी। शिमला में भी मात्र 1.1 मिलीमीटर (MM) बारिश हुई है। चंबा में 2.5 MM, किन्नौर में 0.2 MM, ऊना में 3.1 MM, हमीरपुर में 7.1 MM, कुल्लू में 3.9 MM, सोलन में 5.6 MM, बिलासपुर में 16.2 MM और मंडी में 9.2 MM बरसात हुई है।
अगले सात दिन भी बारिश के कम आसार
इस दौरान कांगड़ा में सर्वाधिक 42.9 मिलीमीटर बारिश जरूरी हुई है। मगर यह भी नॉर्मल से 46 प्रतिशत कम है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की माने तो अगले सात दिन तक भी कम बारिश के आसार हैं। इस दौरान कुछ एक क्षेत्रों में हल्की बारिश होने का पूर्वानुमान है। ज्यादातर क्षेत्रों में मौसम साफ या आसमान में बादल छाए रहेंगे।
मानसून सीजन में 30% ज्यादा बरसात
बेशक, पिछले सप्ताह मानसून धीमा रहा है। मगर राज्य में इस बार हैवी रेनफॉल हुआ है। एक जून से 30 सितंबर के बीच नॉर्मल से 30 प्रतिशत ज्यादा बरसात हुई है। सोलन जिले में नॉर्मल से 94 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। अमूमन इस अवधि में जिले में 746.8MM बारिश होती है,लेकिन इस बार 1450.7MM मेघ बरसे है।
शिमला में नॉर्मल से 85% ज्यादा बारिश
सोलन के बाद शिमला में भी नॉर्मल से 85 प्रतिशत ज्यादा बरसात हुई है। 532.6MM नॉर्मल बारिश की तुलना में इस बार शिमला में 987.8MM मेघ बरसे हैं। शिमला में इसी वजह से जान और माल का भारी नुकसान हुआ है। पहाड़ी के साथ साथ देवदार के पेड़ों ने कहर बरपाया है।
लाहौल स्पीति में नॉर्मल से 32 प्रतिशत कम बारिश
बारिश के लिहाज से कांगड़ा में सर्वाधिक 1618 MM बरसात हुई है। कांगड़ा में इस अवधि में नॉर्मल रेन 1434.1MM होती है। इस लिहाज से कांगड़ा में नार्मल से 13 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। प्रदेश में लाहौल स्पीति इकलौता ऐसा जिला है, जहां नॉर्मल से 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
हैवी रेनफॉल से सदी की सबसे भीषण तबाही
प्रदेश में अब तक की बारिश ने खूब कहर बरपाया है। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश में अभी भी 159 सड़कें बंद पड़ी हैं। असल में इनकी संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है। प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान 398 लोगों की मौत और 39 लोग लापता है।
भारी बारिश, फ्लैड फ्लड और लैंडस्लाइड से 8668 करोड़ रुपए की सरकारी व निजी संपत्ति तबाह हो चुकी है।