सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने मंदिर में चढ़ावे को लेकर कथित अनियमितताओं के विवाद के बीच इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। ट्रस्टियों का कहना है कि कथित चोरी सामने लाने और कानूनी कार्रवाई शुरू कराने के लिए उन्होंने तुरंत कदम उठाए थे।

विवाद तब और तेज हुआ जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे से हर साल करीब ₹18 करोड़ की राशि siphon की जा रही थी। आरोपों पर ट्रस्टियों ने कहा कि संदिग्ध गतिविधियां पकड़ में आने के बाद वे खुद अधिकारियों के पास गए और जांच में सहयोग किया, जिसके बाद कई आरोपी कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई।

ट्रस्टियों ने यह भी दावा किया कि कथित चोरी में शामिल बताए जा रहे कई कर्मचारियों की नियुक्ति पिछली उद्धव ठाकरे-नेतृत्व वाली सरकार के दौरान हुई थी। इसी आधार पर उन्होंने अपने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी।

ट्रस्ट का कहना है कि निगरानी बढ़ाने, मॉनिटरिंग सख्त करने और प्रशासनिक सुधार लागू करने से चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ी है और मंदिर प्रशासन के भीतर जवाबदेही बेहतर हुई है। अधिकारियों के अनुसार, इन उपायों के बाद मंदिर की वार्षिक आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

महाराष्ट्र में इस मामले ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। विपक्षी दल मंदिर निधि के प्रबंधन की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि ट्रस्ट ने सभी जारी जांचों में सहयोग करने की बात कही है। धार्मिक संस्थानों के प्रशासन और दान प्रबंधन को लेकर सार्वजनिक निगरानी के बीच अधिकारी मामले की जांच जारी रखे हुए हैं।


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