सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के सामने जहां मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका देने का सवाल है, वहीं नए चेहरों को शामिल करने पर भी मंथन चल रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उम्मीदवारों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को महत्व दिए जाने की संभावना है।
भाजपा की रणनीति में गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग और गैर-जाटव दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान होने की बात सामने आई है। राज्यसभा की मौजूदा रिक्तियों को पार्टी के सामाजिक प्रतिनिधित्व में बदलाव के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अंतिम उम्मीदवारों की सूची और उनका सामाजिक समीकरण पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।
भाजपा ने संभावित नामों के पैनल में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, स्मृति ईरानी और हरिश द्विवेदी समेत कई नेताओं को शामिल किया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष ब्रजलाल का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में है।
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के मौजूदा विधानसभा आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। प्रत्येक उम्मीदवार को पहली वरीयता के 37 वोट की जरूरत होगी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की प्रभावी संख्या करीब 294 बताई जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास 102 वोट हैं। ऐसे में आठवीं और दसवीं सीट को लेकर मुकाबले में अतिरिक्त वोट और संभावित क्रॉस वोटिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राज्यसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां और तेज होने की संभावना है। इसी वजह से उम्मीदवारों के चयन को केवल राज्यसभा का चुनाव नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
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