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यूं तो भोपाल शहर में कई मंदिर हैं, लेकिन एक ऐसा मंदिर भी है, जो बेल और पीपल के पेड़ की छांव में राजा भोज के किले में कई दशकों पुराना है। यह है हमीदिया अस्पताल परिसर स्थित प्राचीन पंचमुखी नाग मंदिर। नवाबी शासन काल के समय हमीदिया अस्पताल परिसर में रहने वाले रजक मालवीय समाज के स्वर्गीय भालेराव मालवीय ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के पीछे पड़ी खाली जमीन पर पत्थर पर उकेरी हुई नाग देवता की मूर्ति पहली बार देखी। मूर्ति कहां से आई, यह किसी को नहीं पता। पहले सिर्फ मूर्ति का ऊपरी हिस्सा ही दिखता था। कुछ समय बाद स्थानीय लोगों ने खुदाई की तो तकरीबन 3 फीट लम्बी प्रतिमा निकली। माना जाता है की इस मंदिर में कई नाग – नागिन का जोड़ा रहता है।

राजा भोज के किले से जुड़ा है मंदिर

यहां के स्थानीय निवासी राजेश भालेराव ने बताया कि यहां केवल नाग मंदिर नहीं, बल्कि स्वयं नागों का निवास है। यहां कोबरा और क्रेट नाग मंदिर के पास बने घरों से तक निकल चुके है। थोड़ी ऊंचाई पर जाएं तो भोपाल की सुन्दरता को करीब से महसूस किया जा सकता है।

कई बार मंदिर दर्शन करने आते हैं सांप

स्थानीय निवासी जिज्ञासा मालवीय ने बताया कि मंदिर में कई बार दर्शन करने सांप आते हैं। ऊपर की ओर घने पेड़ों में सांप के जोड़े होने का भी दावा है। जिज्ञासा ने बताया कि यहां रहने वालों को कई बार बड़े नाग देवता के दर्शन हुए हैं, लेकिन कभी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।

स्वयं शंभू का है वास

मंदिर ऐसे स्थान में है जहां भगवान शंकर को प्रिय बेलपत्र और अकुआ प्राकृतिक रूप से लगे हैं। साथ ही पीपल, नीम, बरगद के पेड़ भी लगे हैं।