सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने एक बार फिर आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। सरकार भले ही फिलहाल सीधे तौर पर बड़े दाम बढ़ोतरी से बच रही हो, लेकिन आर्थिक संकेत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों और टैक्स संरचना के बीच भारी असंतुलन बना हुआ है। स्थिति यह है कि पेट्रोल और डीजल पर सरकार को प्रति लीटर करीब ₹39 तक का राजस्व घाटा या समायोजन दबाव झेलना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह “घाटा” लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं या रुपये में कमजोरी जारी रही, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल सरकार सब्सिडी और टैक्स मैनेजमेंट के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, ताकि महंगाई पर सीधा असर न पड़े। लेकिन आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा फेरबदल संभव है।
आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिख सकता है।