आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : झारखंड में कुड़मी समाज के लोग आंदोलन कर रहे हैं। वे कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में और कुड़माली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
बंगाल में हाईकोर्ट के दखल के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया है, लेकिन झारखंड में प्रदर्शन तेज है। मुरी और गोमो स्टेशन पर लोग ट्रैक पर उतर आए। वहीं, आंदोलन की शुरुआत से पहले रेलवे सतर्क है। अब तक तीन ट्रेनों को रद्द किया गया है।
20 सितंबर ये ट्रेनें कैंसिल
- ट्रेन संख्या 15027 हटिया – गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन
- ट्रेन संख्या 13403 रांची – भागलपुर एक्सप्रेस ट्रेन
- ट्रेन संख्या 15661 रांची – कामाख्या एक्सप्रेस ट्रेन
आंदोलन का असर
कई जिलों में इसका असर दिखने लगा है। सरायकेला-खरसावां के नीमडीह स्टेशन के पास भारी संख्या में कुड़मी समाज के लोग जुटे। पश्चिमी सिंहभूम के सोनुआ थाना के पास पुलिस से कुछ लोगों के झड़प की भी खबर है। सोनुआ से भी सैकड़ों महिला-पुरुष छोटे बड़े वाहनों में सवार होकर घाघरा की तरफ बढ़ रहे हैं। लोगों के प्रदर्शन को लेकर प्रशासन चौकस है।
इन रूटों पर होगा असर
झारखंड : मनोहरपुर, नीमडीह, गोमो और मुरी
पश्चिम बंगाल : कुस्तौर और खेमाशुली
ओडिशा : बारीपदा और रायरंगपुर स्टेशन
आंदोलन के चलते गोमो स्टेशन पर धनबाद से होकर चलने वाली करीब 60 ट्रेनों पर असर पड़ सकता है। इनमें हावड़ा और सियालदह राजधानी के साथ कोलकाता, सियालदह, आसनसोल और अन्य स्टेशन से खुलने वाली ट्रेनें शामिल हैं।
क्यों हो रहा यह आंदोलन
तीन राज्यों में कुड़मी समाज के लोगों का यह तीसरी बार हो रहा है। केंद्र से उनकी मांग है कि उन्हें आदिवासी का दर्जा दिया जाए। फिलहाल ये लोग ओबीसी वर्ग के दायरे में आते हैं। संगठनों की मानें तो यह समुदाय झारखंड का है, लेकिन यहीं के लोग इन्हें स्वीकार नहीं करते। बंगाल और ओडिशा में भी कुड़मी वर्ग की बड़ी आबादी है। ऐसे में उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए। एक अनुमान के मुताबिक, झारखंड में कुड़मी समाज के लोगों की आबादी 22 प्रतिशत है।
बंगाल में आंदोलन वापस
कुड़मी समाज के लोगों ने बंगाल में आंदोलन वापस ले लिया है। बंगाल में समाज के प्रमुख नेता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि हम पर दबाव बनाया गया है। हाईकोर्ट की राय और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बंगाल में आंदोलन वापस ले लिया जा रहा है।