आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय वायुसेना ने थलसेना और नौसेना के साथ चीन बॉर्डर से लगे सिक्किम के हाई एल्टीट्यूड एरिया में हेलोकास्टिंग और डाइविंग एक्सरसाइज की। यह कॉम्बैट ट्रेनिंग सिक्किम जैसे दूर-दराज वाले इलाकों में युद्ध जैसे हालात बनने पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में जवानों की मदद करती है।
इस स्पेशल प्रैक्टिस के फोटो और वीडियो शुक्रवार शाम भारतीय वायुसेना ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किए। साथ ही लिखा कि तीनों सेनाओं ने एक्स्ट्रीम वैदर कंडीशन में डाइविंग एक्सरसाइज की। हालांकि सेना ने यह कॉम्बैट प्रैक्टिस कब की, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
फोटोज में देखिए सेना की कॉम्बैट ट्रेनिंग..
हेलोकास्टिंग ट्रेनिंग क्या है
हेलोकास्टिंग ट्रेनिंग में सेना में शामिल तैराक और गोताखोर जवान युद्धाभ्यास करते हैं। इन जवानों को अलग-अलग क्षेत्रों जैसे पहाड़ों, मैदानों के वॉटर सोर्स या समुद्र में हेलिकॉप्टर और नावों के जरिए ड्रॉप किया जाता है, ताकि वे रियल वॉर सीन क्रिएट करके सर्चिंग और रेस्क्यू की प्रैक्टिस कर सकें। हेलोकास्टिंग के जरिए मैरीटाइम इक्विपमेंट्स और हथियारों को भी पानी में फेंका जाता है।
हेलोकास्टिंग को मुश्किल हालात में ऑपरेशनल चैलेंजेस के लिए एयरक्रू और ग्राउंड वर्कर्स को तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया है।
चीन ने लद्दाख के न्यूट्रल इलाके में 4 टेंट लगाए, सेना के विरोध के बाद हटाए
जुलाई 2023 में पूर्वी लद्दाख के चुशुल से पार्षद कोंचोक स्टेन्जिन ने बताया था कि चीन की सेना ने चुशुल के बफर जोन यानी न्यूट्रल इलाके में चार टेंट लगाए हैं। यह घटना पूर्वी लद्दाख के गुरुंग हिल्स में टेबल टॉप इलाके की है। काउंसिलर स्टेन्जिन ने बताया कि उन्हें गांववालों ने जानकारी दी थी कि तीन टेंटों को भारतीय सेना के विरोध के बाद हटा दिया गया।
चीन ने अरुणाचल, अक्साई चिन को अपना हिस्सा बताया
चीन ने सोमवार (28 अगस्त) को अपना ऑफिशियल मैप जारी किया है। इसमें भारत के अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चीन, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर को अपने क्षेत्र में दिखाया है। इस पर भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि चीन की पुरानी आदत है। उनके दावों से कुछ नहीं होता।