आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा कर्नाटक में करारी हार की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसी हफ्ते सौंपेंगे। पार्टी ने इस हार को सामूहिक विफलता की श्रेणी के बाहर रखा है। यानी इसके लिए सभी को दोषी नहीं ठहराया जाएगा, बल्कि हार की सभी वजहों और चूक के लिए जिम्मेदारी तय होगी।
भाजपा सूत्रों ने पुष्टि की है कि चुनाव प्रबंधन में कई ऐसी कमियां बार-बार सामने आईं, जिसको लेकर पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने सचेत किया था। येदियुरप्पा को CM पद से हटाने से लेकर, CM बसवराज बोम्मई को फ्री हैंड नहीं दिए जाने, टिकट बंटबारे में दिक्कत और नेताओं की आपसी टकराव जैसे मुद्दों को ठीक करने की जिम्मेदारी जिस टीम पर थी, उसने इसमें चूक या पेश आ रही दिक्कत के बारे में शीर्ष नेतृत्व को नहीं बताया।
केंद्रीय नेतृत्व के सवालों का जवाब नहीं दे पाई कर्नाटक भाजपा
सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व की तरफ ने पूछा गया कि JDS के वोट में गिरावट का लाभ भाजपा को क्यों नहीं मिला। लिंगायत वोट कैसे टूटा और तटीय कर्नाटक में भाजपा पुराना प्रदर्शन क्यों नहीं दोहरा सकी? इस पर स्थानीय इकाई से सही उत्तर नहीं मिला है।
चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोगों ने हर सकारात्मक मुद्दा गंवा दिया और यह मान बैठे की PM नरेंद्र मोदी के दम पर सत्ता में वापसी कर लेंगे, जबकि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में PM ने दो टूक कहा था कि सिर्फ मोदी के भरोसे चुनाव जीतने की न सोचें।
कर्नाटक में हार से टूटा भाजपा का दक्षिण जीतने का सपना
कर्नाटक की हार के साथ ही भाजपा के मिशन दक्षिण की बुनियाद दरक गई है। देश की राजनीति में दक्षिण के 5 राज्यों (कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र और तेलंगाना) की हिस्सेदारी करीब 22-24% है। दक्षिण भारत में विधानसभा की करीब 900 और लोकसभा की 130 सीटें हैं।
भाजपा के पास अभी दक्षिण से 29 सांसद हैं और पार्टी ने इस बार 60 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। मगर इस रास्ते में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है- दक्षिण में कोई स्थानीय कद्दावर नेता न होना। येदियुरप्पा के रूप में एकमात्र मजबूत नेता कर्नाटक में हैं, पर वे भी सक्रिय सियासत से विदा हो चुके हैं।