आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: छह राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। एक तरह से विपक्ष के नए गठबंधन की यह पहली परीक्षा थी। क्योंकि उसके गठन के बाद ये पहले चुनाव या उपचुनाव थे। एनडीए और इंडिया या ये कहें कि भाजपा और इंडिया के बीच मुक़ाबला लगभग बराबरी का रहा।
इन सात में से तीन सीटें भाजपा की थीं। उसे तीन पर ही जीत मिली जबकि इंडिया ने चार सीटों पर जीत दर्ज की। हालाँकि भाजपा ने पश्चिम बंगाल की एक सीट गँवाई लेकिन इसके बदले उसने त्रिपुरा की एक सीट सीपीआई एम से छीनकर खाता बराबर कर लिया।
हो सकता है सात में से चार सीट जीतकर इंडिया यानी विपक्षी गठबंधन ख़ुश हो जाए लेकिन उसके लिए इसमें प्लस कुछ भी नहीं है। तसल्ली ये हो सकती है कि सीटें कम नहीं हुईं। हालाँकि इंडिया अलायंस बना तो लोकसभा चुनाव के लिए है।
इसलिए विपक्षी गठबंधन को ज़्यादा खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बड़ा अंतर होता है। फिर ये तो विधानसभा के उपचुनाव थे जिनमें एकतरफ़ा हवा कोई होती नहीं। सरकार बनने या गिरने का कोई कारण भी इनमें निहित नहीं होता।
हो सकता है विपक्षी गठबंधन धीरे-धीरे अपनी पकड़ बना ले लेकिन लोकसभा चुनावों से पहले तो उसे अब भारत बनाम इंडिया से जूझना पड़ेगा। हालाँकि क्या, कैसा, कब होगा इसका खुलासा 18 से 22 सितंबर के बीच बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में ही होगा, लेकिन जो भी होगा, कुछ अभूतपूर्व ही होगा।
वैसे कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूछा है कि संसद के विशेष सत्र का एजेण्डा क्या है? सरकार इसका खुलासा क्यों नहीं कर रही है? सरकार ने इसका टका सा जवाब दे दिया है कि समय आने पर एजेण्डे का खुलासा ज़रूर कर दिया जाएगा। वैसे परम्परा तो यह है कि एजेण्डा ज़ाहिर कर देने के बाद भी सत्र शुरू होने के दिन तक उसे बदला जा सकता है।
फ़िलहाल तो दिल्ली में जी 20 सम्मेलन की धूम है। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री सुनक दिल्ली पहुँच चुके हैं। चीनी राष्ट्रपति और रूस के राष्ट्रपति को छोड़कर सभी सदस्य देशों के प्रमुख आ रहे हैं और इन सबके सामने सरकार ने इंडिया की बजाय भारत की मार्केटिंग कर दी है।
विपक्षी गठबंधन “इंडिया” को अब कोई नई रणनीति सोचनी होगी। क्योंकि फ़िलहाल तो इंडिया के सामने भारत नहले पर दहला नज़र आ रहा है। आगे क्या होगा, यह भविष्य बताएगा।