आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में वोटिंग हो गई। भारी वोटिंग। पहले वोटिंग परसेंटेज से यह अंदाज़ा आसानी से लगा लिया जाता था कि कौन जीतने वाला है और कौन हारने वाला है, लेकिन अब यही बात सबसे मुश्किल हो चुकी है।

पैंसठ प्रतिशत से ज़्यादा वोटिंग होती थी तो पहले माना जाता था कि यह सत्ता या मौजूदा सरकार के खिलाफ है। यानी सरकार बदलने वाली है, क्योंकि ज़्यादा वोटिंग का मतलब यह समझा जाता था कि लोग अपने घरों से ग़ुस्से में निकले हैं और ग़ुस्सा मौजूदा सरकार या शासन या प्रशासन के प्रति ही होता है।

मध्यप्रदेश के सिरोंज में कुछ पोलिंग स्टेशन पर रात 8 बजे भी वोटर्स की लाइन लगी रही।

कुल मिलाकर चुनावों में ज़्यादा वोटिंग को परिवर्तन की लहर माना जाता था। दरअसल, अब वोटिंग परसेंटेज से हार- जीत का कोई अंदाज़ा लगाना बड़ी टेढ़ी खीर है। लोग जागरूक हो गए हैं। वोट डालना या वोट करना अपना परम कर्तव्य समझते हैं। इसलिए वोट वे ज़रूर डालते हैं। इसी का परिणाम है कि इस बार मध्यप्रदेश में लगभग 75 प्रतिशत से ऊपर और छत्तीसगढ़ में सत्तर प्रतिशत से ज़्यादा वोट पड़े हैं।

हालाँकि, इस वोट परसेंटेज को देखकर कहा जा सकता है कि मप्र में भाजपा और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मन में घबराहट हो सकती है, लेकिन मतदाताओं की जागरूकता का पक्ष देखा जाए तो यह कहा नहीं जा सकता कि ज़्यादा से ज़्यादा वोटिंग सरकार को हटाने के लिए हुई है या सरकार को बचाने के लिए।

मध्यप्रदेश के पिछले आँकड़े देखें जाएँ तो पता चलता है कि 2003 में 67 प्रतिशत मतदान हुआ तो भाजपा की सरकार बनी। 2008 में 69 प्रतिशत मतदान हुआ तब भी भाजपा की सरकार रिपीट हुई। फिर 2013 में 72 प्रतिशत मतदान हुआ तब भी भाजपा की सरकार रिपीट हो गई, लेकिन 2018 में जब 74 प्रतिशत से ज़्यादा मतदान हुआ तो भाजपा पीछे रह गई थी। इस बार भी मप्र का वोट प्रतिशत 75 प्रतिशत से ऊपर जाने वाला है।

असल में क्या होगा, यह तो 3 दिसंबर को चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा, लेकिन पोलिंग बूथ पर उमड़ रही भीड़ की बॉडी लैंग्वेज देखने से पता चलता है कि वोट डालने के लिए लोगों में ग़ज़ब का उत्साह था और यह सरकार बदलने या बचाने से ज़्यादा जागरूकता का मामला लग रहा था।

बहरहाल, राजस्थान में चुनावी हल्ला बोल जारी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिढ़ाया है, उन्होंने एक चुनावी सभा में कहा कि लाल रंग देखकर जैसे सांड भागता है, वैसे ही लाल डायरी का नाम सुनकर गहलोत भागते हैं।