सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कौन हैं IAS अभय सिंह? BJP MLC की शिकायत पर चुनाव आयोग ने हटाया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की मतगणना से ठीक पहले आईएएस अधिकारी अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई भाजपा के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत के बाद हुई। अभय सिंह गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात थे। उनकी जगह 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कौन हैं आईएएस अभय सिंह? अभय सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह 2007 बैच के अधिकारी हैं। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में उन्हें पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी तैनाती उस समय चर्चा में आई, जब भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से शिकायत की।
देवेंद्र प्रताप सिंह ने 23 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग को ईमेल भेजकर अभय सिंह की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। शिकायत में उन्होंने 2019 के अवैध खनन मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज मुकदमे और अधिकारी के आवास पर छापेमारी के दौरान कथित तौर पर नकदी बरामद होने का उल्लेख किया। शिकायतकर्ता ने इन तथ्यों का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और अभय सिंह को पर्यवेक्षक पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं। 26 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक की ड्यूटी से हटाकर रिजर्व में रखा और उनकी जगह प्रकाश बिंदु को नियुक्त किया। यह बदलाव 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना से पहले किया गया। आयोग के इस फैसले से चुनाव की निगरानी और निष्पक्षता को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा तेज हो गई।
चुनावी माहौल में क्यों अहम है मामला? गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मुकाबले के कारण भी चर्चा में रहा है। भाजपा के टिकट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी मैदान में हैं, जबकि टिकट न मिलने से नाराज भाजपा नेता डॉ. संजयन त्रिपाठी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे माहौल में मतगणना से ठीक पहले पर्यवेक्षक को बदलने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल, अभय सिंह को पर्यवेक्षक पद से हटाए जाने को शिकायत के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अवैध खनन मामले से जुड़े आरोपों की स्थिति और उन पर किसी अंतिम निष्कर्ष के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
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