सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : MLC चुनाव की मतगणना MLA-सांसद चुनाव से कैसे अलग? समझें पूरा गणित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर 27 अक्टूबर को मतगणना हो रही है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई इस प्रक्रिया में वोटों की गिनती विधानसभा और लोकसभा चुनावों से अलग तरीके से की जाती है। सामान्य चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए किसी एक उम्मीदवार को वोट दिया जाता है और सबसे ज्यादा वोट पाने वाला प्रत्याशी जीतता है। इसके विपरीत, विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर बैलेट पेपर से मतदान होता है और उम्मीदवारों को वरीयता क्रम दिया जाता है। इसी कारण एमएलसी चुनाव की मतगणना अधिक जटिल और समय लेने वाली हो सकती है।

1. MLA और सांसद चुनाव में कैसे गिने जाते हैं वोट? विधानसभा और लोकसभा चुनावों में आमतौर पर फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली लागू होती है। इसमें मतदाता अपनी पसंद के एक उम्मीदवार को वोट देता है। मतगणना पूरी होने पर जिस प्रत्याशी को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उसे विजेता घोषित किया जाता है। जीतने के लिए कुल वैध मतों का 50 प्रतिशत से अधिक हासिल करना जरूरी नहीं होता। 2. MLC चुनाव में वरीयता के आधार पर मतदान

विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर मतदाता बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के नाम के सामने अपनी पसंद के अनुसार 1, 2, 3 और आगे के अंक लिखते हैं। यहां '1' पहली पसंद, '2' दूसरी पसंद और '3' तीसरी पसंद को दर्शाता है। मतदाता अपनी पसंद के अनुसार एक से अधिक उम्मीदवारों को वरीयता दे सकता है। इस व्यवस्था में सिर्फ पहली पसंद के वोट ही महत्वपूर्ण नहीं होते। यदि किसी उम्मीदवार को जीत के लिए आवश्यक मत नहीं मिलते और वह मतगणना से बाहर हो जाता है, तो उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता के वोट नियमों के अनुसार दूसरे उम्मीदवारों को स्थानांतरित किए जा सकते हैं। 3. क्या है कोटा और वोट ट्रांसफर का गणित? एमएलसी चुनाव की मतगणना में सबसे पहले पहली वरीयता के वोट गिने जाते हैं। संबंधित चुनाव के नियमों के अनुसार जीत के लिए आवश्यक कोटा निर्धारित किया जाता है। यदि कोई उम्मीदवार शुरुआती गिनती में यह कोटा हासिल कर लेता है, तो उसे विजेता घोषित किया जा सकता है। अगर कोई उम्मीदवार आवश्यक कोटा हासिल नहीं करता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर किया जा सकता है। उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वैध वरीयताओं के आधार पर वोट अन्य उम्मीदवारों को स्थानांतरित किए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहती है, जब तक किसी उम्मीदवार को जीत के लिए आवश्यक समर्थन न मिल जाए या लागू नियमों के अनुसार परिणाम तय न हो जाए। 4. MLC चुनाव में कौन डालता है वोट? विधान परिषद की सभी सीटों के लिए एक ही प्रकार का मतदाता समूह नहीं होता। अलग-अलग सीटें अलग निर्वाचन मंडलों से चुनी जाती हैं। इनमें स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि, पंजीकृत स्नातक मतदाता, निर्धारित योग्यता वाले शिक्षक और विधानसभा के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। कुछ सदस्यों को राज्यपाल भी नामित करते हैं। उत्तर प्रदेश में इस बार जिन 11 सीटों पर मतगणना हो रही है, उनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें हैं। इसलिए इन सीटों पर सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह सभी वयस्क मतदाता सीधे वोट नहीं डालते, बल्कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल पात्र मतदाता मतदान करते हैं। 5. मतगणना में ज्यादा समय क्यों लग सकता है? विधानसभा और लोकसभा चुनावों में EVM के परिणामों की गणना अपेक्षाकृत सीधी होती है। लेकिन वरीयता आधारित एमएलसी चुनाव में मतपत्रों की वैधता जांचने, पहली पसंद के वोट गिनने, आवश्यक कोटा तय करने और जरूरत पड़ने पर अगली वरीयताओं के वोट स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसी वजह से परिणाम घोषित होने में अधिक समय लग सकता है।

यूपी की 11 सीटों पर किसकी प्रतिष्ठा दांव पर? उत्तर प्रदेश में इन चुनावों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। कुल 152 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले पर राजनीतिक दलों की खास नजर है। हालांकि, अंतिम तस्वीर मतगणना पूरी होने और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। इस तरह, MLC चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां केवल सबसे ज्यादा पहली पसंद के वोट पाने का मामला नहीं होता। वरीयता क्रम और वोटों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।


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