सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ दिल्ली : वियतनाम में VinFast की मेजबानी में आयोजित एक फोरम में पत्रकारों, उद्योग विशेषज्ञों और वाहन निर्माताओं के बीच इस बात पर सहमति दिखी कि मुख्यधारा के खरीदारों को EV की ओर लाने के लिए सिर्फ सस्ती इलेक्ट्रिक कारें काफी नहीं होंगी।

ईरान संघर्ष के बाद ईंधन कीमतों में तेजी आने से पहले ही भारत का इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन बाजार रफ्तार पकड़ रहा था। इसके पीछे उपभोक्ताओं में बढ़ती जागरूकता और परिवारों के कार खरीदने के फैसलों में आ रहा बदलाव भी अहम कारणों में शामिल रहा।

विशेषज्ञों का broadly मानना है कि Delhi जैसे शहरों में वायु प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंता और जलवायु परिवर्तन के प्रति बढ़ती समझ, इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर उपभोक्ता सोच को प्रभावित कर रही है। वे यह भी रेखांकित करते हैं कि भारत में कार खरीद आम तौर पर परिवार का सामूहिक फैसला होता है, जिसमें बच्चों का प्रभाव बढ़ रहा है। परिवार के युवा सदस्य अक्सर EV के आधुनिक और स्टाइलिश डिजाइन से आकर्षित होते हैं, जिससे घरों में इलेक्ट्रिक मॉडल चुनने की संभावना और बढ़ सकती है।

ईरान संघर्ष ने केवल उस रुझान को और मजबूत किया, जो पहले से तेजी पकड़ रहा था। ज्यादा उपभोक्ता अब सिर्फ कार की खरीद कीमत नहीं, बल्कि उसे रखने और चलाने की कुल लागत पर भी विचार कर रहे हैं।

Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) के अनुसार, भारत में जून में रिकॉर्ड 31,823 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की खुदरा बिक्री हुई। यह एक साल पहले की तुलना में दोगुने से अधिक है और इससे पैसेंजर वाहन बिक्री में EV की हिस्सेदारी 7.7% तक पहुंच गई, जो एक साल पहले 4.8% थी। EV, hybrids और CNG मॉडल सहित वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की हिस्सेदारी पहली बार पैसेंजर वाहन बिक्री के 40% से अधिक रही।

तेज वृद्धि के बावजूद इलेक्ट्रिक कारें अब भी उस देश में सीमित पसंद बनी हुई हैं, जहां हर साल चार मिलियन से अधिक पैसेंजर वाहन बिकते हैं। अवसर बहुत बड़ा है, लेकिन उपभोक्ता रुचि और वास्तविक खरीद के बीच अंतर भी उतना ही बड़ा है। अब सवाल यह है कि लाखों और मुख्यधारा के खरीदारों को बदलाव के लिए क्या राजी करेगा।


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