आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ‘’आज हम बहुत खुश हैं। इतना खुश हैं कि क्या कहें। सरकार का बहुत धन्यवाद। जो वहां काम कर रहे थे, उनका भी बहुत धन्यवाद। इन सबकी मदद से हमारे पति सकुशल टनल से बाहर आ पाए। अब वह जल्द ही घर आ जाएंगे। जब हमारे पति घर आएंगे, तो हम दिवाली धूमधाम से मनाएंगे। खूब गोला और पटाखा दगाएंगे। गांव में मिठाई बांटेंगे। दीप जलाएंगे।’’

यह कहना है उत्तराखंड के टनल में फंसे श्रावस्ती के मजदूर रामसुंदर की पत्नी शीला का। वह पिछले 17 दिनों से पति के घर आने का इंतजार कर रही थीं। उनका यह इंतजार अब खत्म हो रहा है, क्योंकि उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में 12 नवंबर से फंसे सभी 41 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है।

यह खबर जैसे ही शीला तक पहुंची, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बोलीं- जब से पति के टनल में फंसे होने की खबर मिली थी, तभी से हमारे घर में पूजा-पाठ हो रहा था। दिन रात हम अपने पति और गांव के अन्य फंसे लोगों के वापस आने की प्रार्थना कर रहे थे। निवाला हलक से नीचे नहीं जा रहा था। पड़ोसी हौसला दे रहे थे, लेकिन अब सारे दुख दूर हो गए हैं। हमारे पति घर आ रहे हैं। अब जश्न होगा।

दैनिक भास्कर की टीम टनल से बाहर आए मजदूरों के परिवारों के पास गई और उनसे बात की…

आगे बढ़ने से पहले एक नजर घटना पर…

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा आलवेदर रोड के तहत यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे टनल के काम के दौरान 12 नवंबर को सुबह 4 बजे मलबा गिरना शुरू हुआ। 5.30 बजे तक मेन गेट से 200 मीटर अंदर तक मलबा जमा हो गया।

इससे टनल के अंदर काम कर रहे 41 मजदूर फंस गए। जिसके बाद रेस्क्यू शुरू किया गया। मजदूरों को हाईटेक मशीनों से खाना-पानी और ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही थी। मंगलवार यानी 28 नवंबर को रेस्क्यू टीम ने सभी को सकुशल बाहर निकाल लिया। यह ऑपरेशन करीब 16 दिनों तक चला।

पहले जानते हैं उत्तराखंड में फंसे श्रावस्ती के मजदूरों की कहानी। उनके परिजनों ने बेटों के टनल से बाहर आने पर क्या कहा…

श्रावस्ती में जिला मुख्यालय से करीब 65 किमी. दूर सिरसिया थाना क्षेत्र में मोतीपुर कला गांव पड़ता है। यहां पहुंचने के लिए एक पगडंडी जैसे संकरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। इसी गांव के सत्यदेव, राम मिलन, संतोष कुमार, राम सुंदर, जय प्रकाश और अंकित के घर आने का परिवार समेत पूरा गांव इंतजार कर रहा है। मजदूरों की मां, उनकी पत्नी, पिता, भाई और पूरा परिवार हादसे की खबर सुनते ही गम में डूब गया था। पड़ोसी हौसला दे रहे थे।

जब मजदूरों की रिकॉर्डिंग और उनका वीडियो पहली बार परिवार तक पहुंचा था, तभी उनमें अपनों के सुरक्षित होने की आस जग गई थी। मंगलवार यानी 28 नवंबर को टनल में फंसे 41 मजदूरों समेत श्रावस्ती के 6 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया। सभी सकुशल टनल से बाहर आ गए। जिससे 6 परिवारों के चेहरे की उदासी दूर हो गई है। वे खिलखिला रहे हैं। उनके चेहरे की खुशी ही सारी कहानी बयान करने को काफी है।

पिता बोले- बस मेरा बेटा अब जल्दी घर पहुंच जाए

टनल में फंसे राम सुंदर के पिता मनीराम ने कहा, ”वहां जो लोग बाहर थे, मेरे बेटे के साथ ही रहने वाले अन्य मजदूर थे। उन्हीं लोगों ने हमें फोन कर बताया था कि राम सुंदर टनल में फंस गए हैं। बहुत पुलिस आई है। बचाया जा रहा है। वही लोग फोन कर के सब कुछ बता रहे थे। बाकी टीवी और मोबाइल से अपने बच्चों का हाल चाल पता चल रहा था।

हमारे बेटे और गांव के अन्य लड़कों तक वहां काम कर रही टीम पहुंच गई। सभी को बाहर निकाल लिया गया है। अब बस हम इतना चाहते हैं कि हमारे बेटे और गांव के अन्य लड़के जल्द घर पहुंच जाएं। हम उनको देखने के लिए तरस गए हैं।”

अपने 2 भाइयों और एक बहन के साथ घर की चौखट पर बैठे संदीप ने कहा, ”मेरे पापा का नाम राम मिलन है। वो टनल में फंस गए थे। हम अखबार और मोबाइल में उनकी खबरें पढ़ रहे थे। हमारे घर पर टीवी नहीं है, लेकिन पापा से जुड़ी हर खबर का इंतजार कर रहे थे। मेरे पापा जल्दी से घर लौट आएं, इसके लिए मैंने और मेरे भाई-बहनों ने हर रोज भगवान की पूजा की। पापा अब आने ही वाले हैं।”

संदीप ने बताया कि उसकी मां की तबीयत खराब है। घर में सभी लोग उदास हैं। हमारे गांव के पांच लोग और वहां फंसे थे। इस दौरान सभी लोग बहुत परेशान थे। कुछ समझ में नहीं आ रहा था। पापा हमारे हमें पढ़ाना-लिखाना चाहते हैं, इसलिए ही बाहर कमाने गए थे। अब वह घर लौट रहे हैं, तो बता नहीं सकते कि हम कितने खुश हैं।