आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित सिलक्यारा टनल से 17 दिन बाद बाहर आए हिमाचल के विशाल ने ‘दैनिक भास्कर’ से खास बातचीत की। उसने बताया कि टनल बंद होने के बाद शुरुआती 36 घंटे मुश्किल थे। एक दिन बीतने के बाद ऑक्सीजन की कमी होनी शुरू हो गई थी, इससे सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। मगर, 36 घंटे के बाद टनल में बिछी पानी की पाइप अंदर से मजदूरों ने खोल दी और बाहर से कंपनी ने। इसके जरिए हमें ऑक्सीजन मिलना शुरू हुई।
विशाल ने बताया कि 36 घंटे बाद से 12वें दिन तक इसी पाइप के जरिए पॉपकॉर्न और मुरमुरे वगैरह हल्का खाना मिल रहा था। दो-तीन मुट्ठी खाने की वजह से हमें कमजोरी आ रही थी, लेकिन यह मजबूरी थी, क्योंकि इस पाइप से हल्का खाना ही अंदर भेजा सकता था, ताकि ऑक्सीजन की सप्लाई निरंतर बनी रहे। उन्होंने बताया कि पानी पर्याप्त मात्रा में था और 12 दिन बाद तो मोबाइल-चार्जर भी मिल गए। इसके बाद परिजनों से भी बातचीत हो रही थी। तब घबराहट खत्म हो गई थी।
दैनिक भास्कर से विशाल की बातचीत के कुछ अंश..
सवाल: अब आपका स्वास्थ्य कैसा है?
जवाब: मैं अब पूरी तरह स्वस्थ हूं और डॉक्टरों की निगरानी में हूं। कोई घबराहट भी नहीं हो रही।
सवाल: टनल के भीतर आपके 17 दिन कैसे बीते?
जवाब: शुरू के 36 घंटे मुश्किल थे। इसके बाद 12 दिन तक खाना जरूर कम मिल रहा था, लेकिन जिंदा रहने के लिए काफी था।
सवाल: आपको खाना-पीना कितने दिन बाद मिला?
जवाब: 36 घंटे बाद हमे पानी की पाइप के जरिए पॉपकॉर्न और मुरमुरे जैसी चीजें खाने को मिल पाईं। दो से तीन मुट्ठी इसे खाने से कमजोरी आ रही थी, लेकिन छोटी पाइप से इतना ही खाना अंदर भेजा जा सकता था। अंदर ठंड बहुत ज्यादा थी। इससे बचने के लिए मजदूरों ने टनल के भीतर वाटरप्रूफिंग को बिछाए जाने वाले जियो टैक्सटाइल को ओढ़ा, जो पहले से ही टनल के भीतर काफी मात्रा में पड़ा हुआ था।
सवाल: टनल के भीतर छोटे से स्पेस में टॉयलेट, रहन-सहन कैसे मैनेज किया?
जवाब: टनल के भीतर 2400 मीटर का पर्याप्त स्पेस था। इसलिए सभी लोग टॉयलेट के लिए काफी दूर दूसरे कोने पर जाते थे। इस वजह से सारी चीजें अंदर व्यवस्थित थीं।
सवाल: आपके साथ 41 मजदूर अंदर थे। क्या कभी किसी को हौसला देने की जरूरत पड़ी?
जवाब: नहीं, सभी एक परिवार की तरह रह रहे थे और एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे थे। टाइम पास करने के लिए उन्होंने कागज के कार्ड (ताश) बनाए और ताश खेलकर समय बिताया। जैसे ही बाहर के लोगों से कम्युनिकेशन शुरू हुआ। इसके बाद अंदर सारी चीजें नॉर्मल होने लगीं और किसी को कोई डर नहीं लग रहा था।
सवाल: आप अपने घर कब लौट रहे हैं?
जवाब: अभी अस्पताल में उपचाराधीन हूं। डॉक्टर ने छुट्टी को लेकर अभी कुछ भी नहीं बताया।
सवाल: मन में कैसे-कैसे ख्याल आ रहे थे?
जवाब: शुरुआती 36 घंटों के बाद मन में कोई घबराहट नहीं थी। उन्हें पता था कि बाहर भी हलचल शुरू हो गई है और उन्हें बाहर निकालने का काम शुरू हो गया है। टनल के भीतर लाइट नहीं होती तो मुश्किल हो सकती थी।
सवाल: क्या आप दोबारा इसी कंपनी में नौकरी करेंगे?
जवाब: घरवाले मना कर रहे हैं। अपनी सरकार से आग्रह करेंगे कि कहीं जॉब प्रोवाइड कराए।
सवाल: आपसे हिमाचल के किसी नेता व मंत्री आदि ने बात की है?
जवाब: पूर्व CM जयराम ठाकुर का फोन आया था। उन्होंने कुशलक्षेम पूछा है, लेकिन सीएम व मंत्री किसी का भी फोन नहीं आया।
हिमाचल का बेटा ‘विशाल पहाड़’ चीरकर निकाला बाहर:पिता बोले- 17 दिन जिंदगी के सबसे बुरे गुजरे; पर एक पल भी उम्मीद नहीं टूटी
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की बल्ह घाटी का विशाल सुरक्षित बाहर आ गया है। उत्तरकाशी में मौजूद पिता धर्म सिंह और भाई योगेश ने विशाल के बाहर निकलते ही गले लगाया। ‘विशाल’ के पिता धर्म सिंह ने खास बातचीत में बताया कि बेटा पहाड़ चीरकर बाहर आया है। अब इसकी खुशी को बयां करने के लिए उनके पास कोई शब्द नहीं है।