आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की टीम ने बुधवार को छह राज्यों UP, MP, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में छापेमारी की। ये सर्च ऑपरेशन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के 12 ठिकानों पर चल रहा है। PFI को पिछले साल आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते बैन कर दिया गया था।

खबरों के मुताबिक, राजस्थान के टोंक, कोटा, गंगापुर में NIA की टीम ने देर रात दबिश दी है, कई संदिग्धों को पकड़ा है।

NIA की छापेमारी की तस्वीरें…

UP में लखनऊ में 3 घरों में छापेमारी, गली को सील किया

यूपी के 5 शहरों लखनऊ, बारांबकी, बहराइच सीतापुर और हरदोई छापेमारी की। बताया जा रहा है कि छापेमारी केस नंबर 31/2022 के तहत की गई है। लखनऊ के मदेगंज के बड़ी पकरिया इलाके में सुबह 4 गाड़ियों से NIA की टीम पहुंची। पुलिस की टीम भी मौजूद है। अफसर डॉ. शमीम, ख्वाजा समेत 3 घरों में छानबीन कर रहे हैं। गली के दोनों तरफ सील कर दिया गया है। ​​​​​​​ MP में भोपाल के खानू गांव में NIA की रेड, संदिग्ध बुजुर्ग से 7 घंटे पूछताछ

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने बुधवार सुबह भोपाल के खानू गांव में दबिश दी। यहां से एक बुजुर्ग को हिरासत में लिया। उसका नाम मुश्ताक खान (60) बताया जा रहा है। वह करीब एक साल पहले ही इस इलाके में रहने आया था। जांच एजेंसी को उसके PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) से संपर्क के इनपुट मिले हैं। 7 घंटे की पूछताछ के बाद बुजुर्ग को छोड़ दिया गया। इससे पहले NIA ने करीब दो महीने पहले जहांगीराबाद इलाके में छापेमारी की थी।

सरकार ने PFI पर 2022 में पांच साल का बैन लगाया

केंद्र सरकार ने पिछले साल 27 सितंबर को PFI और उससे जुड़े 8 संगठनों पर पांच साल का बैन लगाया था। गृह मंत्रालय ने इन संगठनों को बैन करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। संगठन के खिलाफ टेरर लिंक के सबूत मिले। केंद्र सरकार ने यह एक्शन UAPA के तहत लिया। सरकार ने कहा, PFI और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।

PFI पर बैन: आतंकवाद, फंडिंग, सीक्रेट एजेंडा जैसे 7 पॉइंट में समझिए

  1. PFI से खतरा

PFI और इससे जुड़े संगठन गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। ये गतिविधियां देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इनकी गतिविधियां भी देश की शांति और धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकती हैं। ये संगठन चुपके-चुपके देश के एक तबके में यह भावना जगा रहा था कि देश में असुरक्षा है और इसके जरिए वो कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा था।

  1. PFI का सीक्रेट एजेंडा

क्रिमिनल और टेरर केसेस से जाहिर है कि इस संगठन ने देश की संवैधानिक शक्ति के प्रति असम्मान दिखाया है। बाहर से मिल रही फंडिंग और वैचारिक समर्थन के चलते यह देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। PFI खुले तौर पर तो सोशियो-इकोनॉमिक, एजुकेशनल और पॉलिटिकल ऑर्गनाइजेशन है पर ये समाज के खास वर्ग को कट्टरपंथी बनाने के अपने सीक्रेट एजेंडा पर काम कर रहा है। ये देश के लोकतंत्र को दरकिनार कर रहा है। ये संवैधानिक ढांचे का सम्मान नहीं कर रहा है।

  1. PFI की मजबूती की वजह

PFI ने अपने सहयोगी और फ्रंट बनाए, इसका मकसद समाज में युवाओं, छात्रों, महिलाओं, इमामों, वकीलों और कमजोर वर्गों के बीच पैठ बढ़ाना था। इस पैठ बढ़ाने के पीछे PFI का एकमात्र लक्ष्य अपनी मेंबरशिप, प्रभाव और फंड जुटाने की क्षमता को बढ़ाना था। इन संगठनों की बड़े पैमाने पर पहुंच और फंड जुटाने की क्षमता का इस्तेमाल PFI ने अपनी गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ाने में किया। यही सहयोगी संगठन और फ्रंट्स PFI की जड़ों को मजबूत करते रहे।

  1. PFI की फंडिंग और उस पर एक्शन

बैंकिंग चैनल्स, हवाला और डोनेशन आदि के जरिए PFI और इससे जुड़े संगठनों के लोगों ने भारत और विदेशों से फंड इकट्ठा किया। यह उनके सुनियोजित आपराधिक षडयंत्र का ही एक हिस्सा था। इस फंड के छोटे-छोटे हिस्सों को कई एकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया और ऐसा दिखलाया गया कि यह लीगल फंड है, लेकिन इसका इस्तेमाल आपराधिक, गैरकानूनी और आतंकवादी गतिविधियों में किया गया।