आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अयोध्या में साधु – संतों और ट्रस्टियों ने भी पहली बार प्रभु के विग्रह देखे। विग्रह यानी मूर्तियाँ। तीन हैं। तीनों अद्भुत। इनमें से कोई एक गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। यहाँ इस मंदिर में रामलला की मूर्ति होगी। यानी उनका बाल स्वरूप। पाँच साल के रामलला। जिस पर एक गीत भी है –
“ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनिया…”। यह सब होगा 22 और 23 जनवरी को। इसके पहले 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे। यहीं वे एक आम सभा और रोड शो भी करेंगे।
दरअसल, साढ़े चार सौ साल से चला आ रहा राम मंदिर का संघर्ष अब जाकर फलीभूत हो रहा है। उल्लेखनीय है कि 1526 से 1528 के बीच बाबर के सेनापति मीर बाक़ी ने राम मंदिर तोडकर उसी के मलबे से बाबरी मस्जिद बनवाई थी। तब से कोई सैकड़ों बार इस स्थान पर क़ब्ज़े के लिए दो समुदायों के बीच झगड़े हुए, लेकिन कोई निदान नहीं निकला था।
आख़िरकार 6 दिसंबर 1992 को राम भक्तों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद का ध्वंस कर दिया और फिर कोई 28 साल तक कोर्ट में केस चलते रहे। पहले कौन दोषी, कौन निर्दोष, पर बहस होती रही और बाद में मामला इस प्रश्न में तब्दील हो गया कि आख़िर विवादित ज़मीन पर अधिकार किसका? हालाँकि फ़ैसला सबके हित में या पक्ष में ही आया, लेकिन जिस स्थान पर रामलला विराजमान थे, या जिसे जन्मस्थान कहा जा रहा था वहाँ रामजी का ही अधिकार रहा। वहीं अब भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। लगभग तैयार हो चुका है। अयोध्या में अब इसी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी चल रही है।
निश्चित ही प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या के आसपास के चौरासी कोस क्षेत्र का विकास अपने चरम पर होगा। धर्म क्षेत्रों के विकास में वैसे भी मोदी सरकार ने विलक्षण काम किया है। काशी में विश्वनाथ कोरिडोर हो, उज्जैन में मंदिर का विकास हो या अब अयोध्या का विकास हो, सब कुछ नयनाभिराम है। इस तरह के प्रयासों से संबंधित क्षेत्र का चौतरफ़ा विकास होता है। वहाँ के लोगों की जीविका में ज़मीन – आसमान का फ़र्क़ आ जाता है। ऐसे विकास की देश और देश के लोगों को ज़रूरत है।