आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चुनाव जैसे – जैसे क़रीब आ रहे हैं, नेताओं की सक्रियता बढ़ती जा रही है। राहुल गांधी करतब दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक के बाद एक लगातार सभाएं कर रहे हैं। मुद्दा बना हुआ है राहुल गांधी का वह बयान जिसमें उन्होंने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो कांग्रेस की जीत पक्की बताई थी, लेकिन राजस्थान में मुक़ाबला करीबी बता दिया था।
भाजपा कह रही है कि राहुल गांधी समझदार नेता हैं। वे जानते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस बुरी तरह हारने वाली है इसलिए यहाँ उन्होंने अपनी जीत पक्की नहीं बताई।अब अगर राहुल का अनुमान ही भाजपा को सोलह आने सच लग रहा है तो उसे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में अपनी हार मान लेनी चाहिए, तर्क यह हो जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है।
भाजपा राजस्थान में राहुल की बात को तो समझदारी मान रही है, लेकिन मध्यप्रदेश और राजस्थान में उन्हीं राहुल की बात को झूठ बताती फिर रही है।
ख़ैर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल गांधी की बात को सकारात्मक चुनौती के रूप में लिया है। उनका कहना है कि राहुल की इस चुनौती को हम स्वीकार करते हैं और राज्य में दोबारा जीतकर दिखाएँगे। मप्र के कमलनाथ और छत्तीसगढ़ के बघेल ने इस बारे में अब तक कुछ नहीं बोला है। बहरहाल, तीनों ही राज्यों में कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुक़ाबला है। गुजरात की तरह यहाँ आप पार्टी का हल्ला भी नहीं है और इनके अलावा किसी अन्य पार्टी का वैसा ज़ोर भी नहीं।
यही वजह है कि सीधे मुक़ाबले में कांग्रेस और भाजपा दोनों को यह भरोसा नहीं है कि हम जीत ही जाएँगे। छत्तीसगढ़ में एक पार्टी का पलड़ा ज़रूर भारी लग रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश और राजस्थान में तो दोनों का विश्वास बुरी तरह हिला हुआ लग रहा है। भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अब तक आगे नहीं किया है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इसका नुक़सान भाजपा को हो सकता है।
हालाँकि, भाजपा के पक्ष में यहाँ एक ही बात है कि यहाँ हर बार सत्ता बदलने का रिवाज है। अब सवाल यह उठता है कि क्या मध्यप्रदेश की तरह राजस्थान में भी भाजपा कुछ केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने जा रही है। हालाँकि, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा कि स्थिति एक जैसी नहीं है।
मप्र में अठारह साल की एंटी इंकमबेंसी खड़ी हुई है, जबकि राजस्थान में यह उल्टे कांग्रेस के खिलाफ है। वैसे अब तक कांग्रेस ने तीनों ही राज्यों में अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जबकि चुनाव के बहुत पहले टिकटें घोषित करने का दावा कांग्रेस ने ही सबसे पहले किया था।