आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस बात पर नाराजगी जताई की राज्य सरकारें विधानसभा से पारित बिलों को राज्यपाल से पास कराने के लिए बार-बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाती हैं।
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा- राज्यपालों को यह समझना चाहिए कि वो चुनी हुई अथॉरिटीज नहीं हैं। राज्य सरकारों के कोर्ट जाने के बाद ही गवर्नर बिल पर कार्रवाई क्यों करते हैं? इसे रोकना होगा।
CJI की अगुवाई वाली बेंच पंजाब सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित पर आरोप है कि वे विधानसभा से पारित 7 बिलों को पास नहीं कर रहे हैं।
इस पर राज्यपाल की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट ने को बताया कि गवर्नर ने निर्णय लिए हैं। शुक्रवार तक डिटेल मिल जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।
कोर्ट रूम LIVE…
डॉ.अभिषेक मनु सिंघवी: राजकोषीय प्रबंधन, जीएसटी में संशोधन, गुरुद्वारा प्रबंधन आदि से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक जुलाई में राज्यपाल के विचार के लिए भेजे गए थे। ये अब तक पास नहीं हुए हैं जिसके कारण सरकार के कामकाज पर असर पड़ा है। राज्यपाल अनियमितताओं का हवाला देकर इन बिलों को पास करने पर विचार नहीं कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट: पार्टी को सुप्रीम कोर्ट क्यों आना पड़ता है? राज्यपाल तभी कार्रवाई करते हैं जब मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं। इसे रोकना होगा। आप सुप्रीम कोर्ट आते हैं तब राज्यपाल कार्रवाई करना शुरू करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसी ही स्थिति तेलंगाना में भी हुई, जहां राज्यपाल ने सरकार के याचिका दायर करने के बाद ही लंबित बिलों पर कार्रवाई की।
CJI चंद्रचूड़: मार्च में विधानसभा बुलाई गई, फिर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। स्पीकर ने जून में विधानसभा की बैठक दोबारा बुलाई। क्या ये वाकई संविधान के तहत चल रहा है। आपको 6 महीने में एक सत्र बुलाना होता है न?
सभी राज्यपालों को आत्ममंथन करना होगा कि बजट सत्र बुलाने के लिए पार्टियों को सुप्रीम कोर्ट जाने की जरूरत ही क्यों होनी चाहिए?…ये राज्यपाल और सीएम द्वारा तय किए जाने वाले मामले हैं।
पंजाब सरकार की मांग- कोर्ट गवर्नर को निर्देश दे
पंजाब सरकार ने याचिका में मांग की थी कि विधानसभा में पास बिलों को मंजूरी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट गवर्नर को निर्देश दें। सरकार ने यह भी कहा कि इस तरह की संवैधानिक निष्क्रियता की वजह से प्रशासन का कामकाज ठप हो गया है। इससे पहले CM भगवंत मान भी कहते रहे हैं कि गवर्नर इलेक्टेड नहीं बल्कि सिलेक्टिड हैं। पंजाब की जनता ने सरकार चलाने के लिए उन्हें चुना है, राज्यपाल को नहीं।
SC पहुंचने पर 2 बिल मंजूर कर चुके गवर्नर
दरअसल, सरकार के सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल करने के बाद पंजाब के गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित अपने स्टैंड से यू-टर्न ले चुके हैं। वे विधानसभा में पारित कराने के लिए तैयार 3 मनी बिलों में से 2 को मंजूरी दे चुके हैं। हालांकि कई बिल अभी लटके हैं।
उधर राज्य सरकार के जिन दो मनी बिलों को गवर्नर ने मंजूरी दे दी है, उनमें जीएसटी संशोधन बिल 2023 शामिल है। इसके तहत राज्य में जीएसटी एपिलेट ट्रिब्यूनल बनाए जाने हैं। दूसरा मनी बिल गिरवी रखी जाने वाली जायदादों पर स्टांप ड्यूटी लगाने से जुड़ा है।
एक और सत्र बुलाने की तैयारी में सरकार
राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित की ओर से 2 मनी बिलों को मंजूरी दिए जाने के बाद अब भगवंत मान सरकार नवंबर महीने में ही एक बार फिर विधानसभा का सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। नए सत्र को लेकर AG ऑफिस से कानूनी पहलुओं पर राय ली जा चुकी है। विधानसभा सत्र की तारीख तय करने के लिए मुख्यमंत्री ने आज कैबिनेट की मीटिंग में फैसला ले सकते हैं।
अभी चार बिल पेंडिंग
पंजाब विधानसभा के जून 2023 महीने में हुए स्पेशल सेशन में पास किए गए चार बिलों को अभी तक गवर्नर ने अपनी मंजूरी नहीं दी है। इस पर मुख्यमंत्री अपनी आपत्ति जता चुके हैं। उधर राज्यपाल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस पर अपना पक्ष रख सकते हैं।