नई दिल्ली । यूक्रेन संकट के चलते रसोई का बजट बढ़ सकता है। दरअसल, यूक्रेन संकट से घरेलू बाजार में सूरजमुखी ऑयल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। इससे सूरजमुखी के तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालां‎कि इस बार सरसों की बंपर पैदावर हुई है, इसलिए सरसों तेल की कीमत में बढ़ोत्तरी के आसार नहीं हैं। भारत करीब 35 लाख टन सूरजमुखी के तेल का उपयोग करता है।

यह देश में कुल खाद्य तेल खपत का 20 फीसद है। गौरतलब ‎है ‎कि दुनिया में यूक्रेन सूरजमुखी के तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है। विश्व में 70 फीसद सूरजमुखी का तेल यूक्रेन निर्यात करता है। इसके अलावा 20 फीसद रूस और 10 फीसद अर्जेंटीना से आता है। इस तरह करीब 90 फीसद सूरजमुखी का तेल रूस और यूक्रेन निर्यात करता है, जहां इस समय हालात ठीक नहीं हैं। अडानी विल्मर के एक व‎रिष्ठ अ‎धिकारी ने कहा ‎कि आमतौर पर एक विनिर्माता करीब 45 से 55 दिनों का सरप्लस स्टॉक रखता है।

रूस और यूक्रेन से माल आना पिछले चार दिनों से कम हो गया था। अब यह रुक गया है। अडानी विल्मर ने रूस-यूक्रेन संकट के शुरुआती संकेत मिलने पर ही स्टॉक करना शुरू कर दिया था। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियां सूरजमुखी के तेल के लिए अर्जेंटीना और रूस की ओर देखेंगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से दिसंबर के दौरान भारत का 65 फीसद सूरजमुखी के बीज का आयात, जो करीब 2 अरब डॉलर का है, यूक्रेन से था। उत्पाद श्रेणी में भारत के कुल आयात में यूक्रेन की एनिमल व वेजिटेबल वसा और तेल की हिस्सेदारी करीब 10 फीसद है।