सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आईआईटी प्रवेश प्रक्रिया 2026 के आंकड़ों ने स्वीकृत सीट क्षमता और वास्तविक आवंटित सीटों के बीच अंतर को सामने रखा है। प्रवेश डेटा के अनुसार, देश के 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से 16 आईआईटी ने 2026 प्रवेश चक्र में अपनी सूचीबद्ध क्षमता से अधिक सीटें आवंटित कीं।

इस अंतर को अधिसंख्य सीटों और अन्य प्रवेश प्रावधानों के अमल से जोड़ा गया है, जिनका उद्देश्य प्रतिनिधित्व बढ़ाना और पात्र अभ्यर्थियों को समायोजित करना है। ऐसी अतिरिक्त सीटें सामान्य स्वीकृत क्षमता से अलग बनाई जाती हैं और इनमें महिला अभ्यर्थियों तथा निर्धारित प्रवेश नीतियों के तहत अन्य श्रेणियों के लिए प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि कई आईआईटी में वास्तविक रूप से प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या आधिकारिक सीट मैट्रिक्स में दिखाई गई क्षमता से अधिक हो सकती है। आईआईटी प्रवेश का आकलन करते समय यह फर्क अहम है, क्योंकि सूचीबद्ध क्षमता हमेशा उन अंतिम सीटों की संख्या नहीं होती, जिन पर आवंटन किया जा सकता है।

आईआईटी में प्रवेश मुख्य रूप से जेईई एडवांस्ड रैंकिंग के आधार पर होता है, जिसके बाद जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी की केंद्रीकृत काउंसलिंग प्रक्रिया चलती है। इस प्रवेश व्यवस्था में श्रेणीवार आरक्षण, लैंगिक-निरपेक्ष सीटें और अधिसंख्य प्रावधान शामिल किए जाते हैं।

2026 के आंकड़ों ने यह ध्यान खींचा है कि आईआईटी अपने मौजूदा शैक्षणिक ढांचे के भीतर पहुंच का दायरा कैसे बढ़ा रहे हैं। कई संस्थानों में अधिक आवंटन यह भी दिखाता है कि नियमित स्वीकृत सीट क्षमता में उसी अनुपात में विस्तार किए बिना भी विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ाने की कोशिश जारी है।


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