आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने डॉक्टरों को सलाह दी है कि उन्हें साइनबोर्ड, विजिटिंग कार्ड और अनाउंसमेंट्स के जरिए जनता को भ्रमित करने से बचना चाहिए। कमीशन ने कहा कि साइनबोर्ड और डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन पेपर्स पर डॉक्टर का नाम, क्वॉलिफिकेशन, टाइटल, स्पेशियल्टी और रजिस्ट्रेशन नंबर के अलावा कुछ नहीं होना चाहिए।
NMC ने ये भी कहा है कि डॉक्टरों को केमिस्ट शॉप या ऐसी किसी जगह साइन बोर्ड नहीं लगाना चाहिए जहां वह न तो रहता है और न ही काम करता है। ये सभी बातें कमीशन के एथिक्स एंड मेडिकल रेजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) ने अपनी ई-बुक ‘प्रोफेशनल कंडक्ट रिव्यू-लेसंस फ्रॉम केस आर्काइव्स’ में कहीं हैं।
डॉक्टर-पेशेंट के बीच भरोसा जरूरी
इस किताब में ये भी कहा गया है कि डॉक्टर-पेशेंट के रिश्ते के बीच भरोसा होता है तो इसकी वजह से डॉक्टरों के ऊपर मुकदमा किए जाने का चांस बढ़ता है। डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतों का सबसे आम कारण होता है कम्युनिकेशन गैप।
कमीशन ने कहा कि मेडिकल प्रैक्टिशनर्स किसी फील्ड से जुड़े अलग-अलग एरिया में स्किल और ट्रेनिंग हासिल कर सकते हैं, लेकिन कंसल्टेंट या स्पेशलिस्ट का टाइटल सिर्फ उन डॉक्टरों को इस्तेमाल करना चाहिए जो उस खास फील्ड में क्वॉलिफाइड हैं।
केस स्टडी की सीख के आधार पर लिखी किताब
ई-बुक के एडिटर और एथिक्स एंड मेडिकल रेजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) के सदस्य डॉ योगेन्द्र मलिक ने कहा कि बोर्ड डॉक्टरों के खिलाफ दुर्व्यवहार के मामलों की सुनवाई करता रहा है और इनमें फैसले सुनाता रहा है। इन मामलों से जो सीख मिलती है उसे डॉक्टर्स तक पहुंचाने की जरूरत शुरू से ही महसूस की गई थी।
उन्होंने कहा कि इस विचार को बोर्ड के साथ शेयर किया गया और एक्सपर्ट्स का एक ग्रुप बनाया गया। इन एक्सपर्ट्स ने बहुत मेहनत से काम किया, हर केस के हजारों पेज पढ़े और उन केसेस का सार खोए बिना उन्हें संक्षिप्त में लिखा।
इस किताब में दी गई केस स्टडी बताती है कि एक पेशेंट के लिए एथिक्स, कंडक्ट और लापरवाही के बीच फर्क करना मुश्किल होता है। डॉक्टरों को भी लगता है कि जब तक कोई खतरा न हो, तब तक पेशेंट्स को शिकायत करने का कोई अधिकार नहीं होता है।