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भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले पर पूर्व भारतीय कोच रवि शास्त्री ने निराशा जताई है। उनका मानना है कि शमी को टेस्ट क्रिकेट से विदाई लेने से पहले एक और मौका मिलना चाहिए था। शास्त्री ने चयनकर्ताओं के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शमी के भीतर अभी 30 से 40 टेस्ट विकेट लेने की क्षमता बाकी थी।

शमी ने 6 नवंबर 2026 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने 13 साल के टेस्ट करियर में 64 मुकाबले खेले और 229 विकेट हासिल किए। उनका आखिरी टेस्ट मैच जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल था।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे वनडे से पहले बातचीत के दौरान शास्त्री ने कहा कि शमी को पिछले 12 महीनों में टेस्ट टीम में खेलने का अवसर मिलना चाहिए था। उन्होंने फिटनेस को लेकर उठाए गए सवालों पर भी अपनी असहमति जताई। शास्त्री के मुताबिक, किसी तेज गेंदबाज की फिटनेस का आकलन केवल जिम में उसकी क्षमता से नहीं, बल्कि मैच के दौरान लगातार गेंदबाजी करने की क्षमता से होना चाहिए।

बंगाल के लिए प्रदर्शन का दिया हवाला

शास्त्री ने कहा कि शमी घरेलू क्रिकेट में बंगाल के लिए नियमित रूप से खेल रहे थे और एक मैच में 15 से 20 ओवर तक गेंदबाजी कर रहे थे। ऐसे में उनकी मैच फिटनेस पर सवाल उठाना उचित नहीं लगता। उन्होंने चयनकर्ताओं से सवाल किया कि आखिर एक खिलाड़ी को अपनी फिटनेस साबित करने के लिए और क्या करना चाहिए।

शमी चोटों के कारण लंबे समय तक भारतीय टीम से बाहर रहे थे। फरवरी 2024 में उनके टखने की सर्जरी हुई थी और बाद में घुटने की परेशानी ने भी उनकी वापसी प्रभावित की। हालांकि, घरेलू क्रिकेट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। 2026-27 रणजी ट्रॉफी के शुरुआती तीन मैचों में उन्होंने 14 विकेट लिए।

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बावजूद शमी सीमित ओवरों के प्रारूप में खेलना जारी रखेंगे। शास्त्री का मानना है कि अनुभव और फॉर्म के आधार पर भविष्य में भारतीय टीम को उनकी सेवाओं की जरूरत पड़ सकती है।


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