आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित शांतिनिकेतन को यूनेस्को से विश्व धरोहर का दर्जा मिलने पर विश्व भारती सेंट्रल यूनिवर्सिटी में तीन शिलालेख लगाए गए हैं। इन पर यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वाइस चांसलर बिद्युत चक्रवर्ती का नाम लिखा है। नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर का नाम इस पर नहीं है।

बंगाल सरकार ने इसकी आलोचना की है। गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- शांतिनिकेतन की पहचान रविंद्रनाथ टैगोर से है और शिलालेख से उन्हीं का नाम हटा दिया। हम दुर्गा पूजा के कारण चुप थे।

अगर विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने 24 घंटे के भीतर टैगोर के नाम का नया शिलालेख नहीं लगाया तो हम कविगुरु की तस्वीर अपने सीने पर रखकर प्रदर्शन करेंगे। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं ने आज सुबह 11 बजे यूनिवर्सिटी के बाहर प्रदर्शन भी किया।

वाइस चांसलर ने कहा- भारत सरकार से इजाजत ली

वहीं बंगाल के गवर्नर सी वी आनंद बोस ने भी यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण मांगा। राज भवन के सूत्रों ने बताया कि वाइस चांसलर बिद्युत चक्रवर्ती ने अपने जवाब में कहा कि शिलालेख पर क्या लिखना है, इसकी अनुमति उन्होंने भारत सरकार के पुरातत्व विभाग से ली थी।

हालांकि राज्यपाल ने कहा- रविंद्रनाथ टैगोर सिर्फ बंगाल या भारत, बल्कि मानवता की महानता के प्रतीक हैं। नई शिलालेख पर उनका नाम लिखकर सम्मान देना चाहिए।

भाजपा ने ममता पर राजनीति करने का आरोप लगाया

वहीं बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा- रविंद्रनाथ टैगोर शांतिनिकेतन और विश्व भारती में हमेशा मौजूद हैं। सब जानते हैं कि टैगोर के बिना शांतिनिकेतन कुछ नहीं है। ममता बनर्जी राजनीतिक फायदे के लिए विवाद को बढ़ा रही हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर के पिता ने की थी शांतिनिकेतन की स्थापना

शांतिनिकेतन की शुरुआत रविंद्रनाथ टैगोर के पिता देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में एक आश्रम के तौर पर की थी। 1901 में रविंद्रनाथ टैगोर ने इसे प्राचीन भारत के गुरुकुल सिस्टम पर आधारित रेजिडेंशियल स्कूल और आर्ट सेंटर में बदला।

टैगोर ने 1921 में यहां विश्व भारती की स्थापना की, जिसे 1951 में सेंट्रल यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया। रविंद्रनाथ टैगोर ने अपने जीवन का लंबा समय यहां बिताया था।