मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को फिर से नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की है। गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही इसके संकेत दे चुके थे। पिछले ही महीने रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी की थी और अब इस महीने फिर से 0.50 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है। अब रेपो रेट की नई दर 4.90 फीसदी हो गई है। इस बढ़ोतरी के चलते फिर से आपकी ईएमआई महंगी हो जाएगी। रेपो रेट बढ़ने का सीधा सा मतलब है कि रिजर्व बैंक की तरफ से बैंकों को लोन महंगी दर पर मिलेगा। ऐसे में बैंक इस बढ़ोतरी को ग्राहकों तक ट्रांसफर करेंगे और उनके लिए भी कर्ज लेने की दरें महंगी हो जाएंगी।

वहीं अगर आपको होम लोन चल रहा है तो उसकी ईएमआई में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। गौरतलब है कि इससे पहले देश में लगातार बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए मई महीने में आरबीआई ने बिना पूर्व सूचना के एमपीसी की बैठक का आयोजन किया था और इसमें रेपो रेट में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी करने का एलान किया था। इसके बाद ये दरें 2020 से एतिहासिक निचले स्तर यानी चार फीसदी पर रहने के बाद अचानक से 4.40 फीसदी हो गईं।

इस इजाफे के बाद आरबीआई गवर्नर ने भी पहले ही संकेत दे दिए थे कि रेपो दरों में जून में होने वाली बैठक में और बढ़ोतरी की जा सकती है। दास ने एमपीसी की बैठक में लिए गए नतीजों का एलान करते हुए कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और वैश्विक घटनाक्रमों के चलते सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इस बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए आरबीआई का सख्त कदम उठाना पड़ा है।

रेपो दरों में बढ़ोतरी के साथ ही आरबीआई ने एमएसएफ को 50 बीपीएस बढ़ाकर 5.15 फीसदी, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) को बढ़ाकर 4.65 फीसदी कर दिया है। आरबीआई के इस फैसले के बाद लोन लेने वाले ग्राहकों को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि रेपो दरों में वृद्धि के चलते होम, ऑटो और पर्सनल लोन समेत सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे और ग्राहकों की ईएमआई में इजाफा हो जाएगा। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जिस तक के भू-राजनैतिक हालात पैदा हुए हैं, इनके बीच इस तरह का फैसला लेना बेहद जरूरी था।