आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना से पटियाला जेल में मिलने पहुंचे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) नेताओं को पंजाब पुलिस ने रोक दिया। एसजीपीसी पदाधिकारी राजोआना की जेल में 5 दिसंबर से शुरू होने वाली भूख हड़ताल रुकवाने के लिए उससे मिलने पहुंचे थे।
SGPC शिष्टमंडल को पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने पटियाला जेल के बाहर ही रोक लिया। शिष्टमंडल को रोके जाने के बाद जेल के सहायक सुपरिटेंडेंट हरचरन सिंह गिल बात करने के लिए पहुंचे। जिन्होंने कहा कि जेल प्रशासन की तरफ से मुलाकात के लिए मंजूरी नहीं मिल पाई है।
हर रोज हर मुलाकात के लिए सीनियर अधिकारियों की तरफ से फैसला लिया जाता है। सोमवार की मुलाकात के लिए भी सीनियर अधिकारियों के आदेशों पर कुछ कह पाएंगे। यह कहकर सहायक सुपरिटेंडेंट वापिस लौट गए। इस पर अकाली दल के नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया भड़क गए।
मजीठिया बोले- प्रोटोकॉल के साथ राजोआना को मिलने के लिए आए थे
मजीठिया ने कहा कि SGPC की ओर से दिए गए आदेशानुसार वह सभी प्रोटोकॉल के साथ राजोआना को मिलने के लिए आए थे मगर, उन्हें पहले ही रोक दिया गया। पंजाब की भगवंत मान सरकार के आदेश पर उन्हें मुलाकात से रोका गया। उनके पहुंचने से पहले ही पटियाला सेंट्रल जेल के बाहर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी जबकि वह पंजाब पुलिस के एडीजीपी जेल से अनुमति लेकर यहां आए थे।
मजीठिया ने कहा कि जेल अधिकारियों द्वारा जारी पत्र उनके पास है, जिसमें एसजीपीसी के वफद की बलवंत सिंह राजोआना के साथ मुलाकात करवाने के बारे में जिक्र है।
SGPC और अकाली दल से खफा राजोआना
SGPC का कहना है कि राजोआना कौमी शहीद हैं और कौम नहीं चाहती कि वे भूख हड़ताल पर जाएं। जबकि, राजोआना SGPC व अकाली दल के ठोस कदम न उठाए जाने से खफा हैं। राजोआना चाहते हैं कि SGPC की तरफ से 2011 में राष्ट्रपति को दी गई मरसी पिटीशन वापस ली जाए। वहीं, केंद्र सरकार भी उनकी मौत की सजा पर कोई एक तरफा फैसला ले।
वे अकाली दल से भी खफा हैं कि 10 साल राज्य व केंद्र में एक साथ रहने पर भी उनकी तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और उनकी सजा पर कोई फैसला नहीं लिया गया।
आगे की रणनीति ने बताने से पहले SGPC को रोका
पहले 30 नवंबर, फिर 2 दिसंबर और 3 दिसंबर की सुबह हुई बैठकों में SGPC आज बलवंत सिंह राजोआना से मुलाकात कर उन्हें 5 दिसंबर की हड़ताल पर न जाने की मांग रखने वाली थी। वहीं, SGPC बलवंत सिंह राजोआना को मिलकर आगे की रणनीति के बारे में बताती, ताकि राजोआना को SGPC के प्रयासों के बारे में जानकारी मिल सके और वे अपने हड़ताल पर जाने के फैसले को बदल सकें।