सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: बारिश से दिल्ली की हवा को मिलती है अस्थायी राहत, पांच दिन में लौटता प्रदूषण

नई दिल्ली। दिल्ली में बारिश के बाद हवा की गुणवत्ता में सुधार देखकर लोगों को अक्सर उम्मीद होती है कि प्रदूषण से लंबे समय तक राहत मिलेगी, लेकिन एक नए शोध ने इस धारणा पर सवाल खड़े किए हैं। 22 वर्षों के अध्ययन में सामने आया है कि बारिश के बाद वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कण कई मामलों में पांच दिनों के भीतर फिर से पहले के स्तर पर पहुंच जाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि केवल बारिश के भरोसे राजधानी की हवा को साफ नहीं रखा जा सकता।

शोधकर्ताओं ने वर्ष 2003 से 2024 के बीच दिल्ली में हुई बारिश की 612 घटनाओं का अध्ययन किया। इनमें से 310 मामलों में, यानी आधे से अधिक घटनाओं में, प्रदूषण के कण पांच दिनों के भीतर बारिश से पहले के स्तर पर लौट आए। वहीं, लगभग 45 प्रतिशत घटनाओं में 30 दिन बाद भी कणों का स्तर पहले जैसी स्थिति में नहीं पहुंचा था।

अध्ययन के अनुसार, बारिश वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कणों को नीचे गिराकर अस्थायी राहत देती है, लेकिन वाहन, उद्योग, निर्माण गतिविधियां और अन्य स्रोत लगातार प्रदूषक उत्सर्जित करते रहते हैं। वातावरण में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं से नए प्रदूषण कण भी बनते हैं। यही कारण है कि बारिश रुकने के बाद प्रदूषण दोबारा बढ़ने लगता है।

शोध में यह भी सामने आया कि अधिक बारिश होने का अर्थ लंबे समय तक साफ हवा मिलना नहीं है। बारिश की मात्रा और प्रदूषण के कणों के दोबारा लौटने की गति के बीच कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया। मौसम के अनुसार यह अवधि अलग-अलग रही। मानसून में प्रदूषण के कणों को पुराने स्तर पर लौटने में औसतन छह दिन, गर्मी और सर्दी में पांच दिन तथा मानसून के बाद के मौसम में तीन दिन लगे।

यह अध्ययन केरल स्थित अमृता विश्व विद्यापीठम के शोधकर्ताओं गायत्री बालाचंद्रन और डॉ. सुमित सतींद्रन एस ने किया है। शोध सितंबर 2026 में जर्नल ऑफ एटमॉस्फेरिक एंड सोलर टेरेस्ट्रियल फिजिक्स में प्रकाशित हुआ।

शोध में एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ (AOD) के उपग्रह आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। यह पैमाना वातावरण में मौजूद कणों द्वारा प्रकाश को रोकने या बिखेरने की मात्रा बताता है। हालांकि, यह जमीन के स्तर पर दर्ज वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का प्रत्यक्ष माप नहीं है।

अध्ययन का निष्कर्ष है कि बारिश प्रदूषण से कुछ समय के लिए राहत जरूर दे सकती है, लेकिन स्थायी सुधार के लिए वाहनों, उद्योगों और निर्माण गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन पर लगातार नियंत्रण जरूरी है।


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