आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पंजाब विधानसभा शीत सत्र के दूसरे और अंतिम दिन एक बार फिर लॉ एंड ऑर्डर पर हंगामा शुरू हो गया। प्रस्ताव पेश करने के दौरान विपक्ष नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब के मुद्दों को उठाने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। जब स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने स्पष्ट किया कि मुद्दे उठाए जा चुके हैं तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।
वहीं, कांग्रेस के वॉक-आउट के बाद विधानसभा में नए संशोधन बिल पेश किए गए। उनके पास होते ही विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस दौरान तीन मनी बिलों सहित कुल चार बिल सदन में पास किए गए। इनमें ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी शोध बिल 2023, रजिस्ट्रेशन शोध बिल 2023, इंडियन स्टांप बिल 2023 और पंजाब कनाल एंड ड्रेनेज बिल 2023 को पास किया गया।
प्रताप सिंह बाजवा का कहना था कि पंजाब के लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति गंभीर है और नशे पर भी डिटेल्ड बात होनी चाहिए। सत्र को सिर्फ दो दिन बुलाना सही नहीं है। ऐसे में पंजाब के मुद्दों को सही से उठाया नहीं जा सकता। उन्होंने इसके बाद सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए सदन से वॉक-आउट कर लिया। उनके साथ कई कांग्रेसी नेता भी सदन से चले गए। जिसके बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
इससे पहले शीत सत्र के दौरान अकाली दल विधायक सुखविंदर सिंह सुखी ने पंजाब के लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर भी चिंता जाहिर की। विधायक सुखी ने कहा कि पंजाब में तकरीबन 7 महीने पहले जेल से लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू ब्रॉडकास्ट हुआ था। ये मुद्दा पंजाब हरियाणा सरकार द्वारा उठाया गया, लेकिन उसमें हैरान करने वाला जवाब एडीजीपी जेल की तरफ से दिया गया कि इंटरव्यू कब और कहां हुआ, उसे ट्रेस नहीं किया जा सकता।
SYL पर चर्चा की मांग
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने सतलुज यमुना लिंक नहर का मुद्दा उठाया और विधानसभा में इस पर लंबी चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस चर्चा को लुधियाना तक ले गए। उन्होंने मांग की कि इस संबंध में सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएं। 1982 के बाद पानी पर कोई श्वेत पत्र नहीं आया। इसलिए इस संबंध में नया श्वेत पत्र लाया जाना चाहिए।
स्पीकर ने पूछा हाउस से सवाल, इनाम में मिले 3 मिनट एक्स्ट्रा
जीरो आवर में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने हाउस में एक सवाल पूछ तीन मिनट एक्स्ट्रा इनाम देने की घोषणा कर दी। उनका सवाल था, सरदार नरिंदर सिंह कपानी कौन हैं। जिस पर विधायक अमृतपाल सिंह सुखानंद ने जवाब दिया कि वे उनके हलका मोगा के ही हैं और उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स पर काम किया। जिसके बाद उन्हें हाउस की तरफ से तीन मिनट ऐक्स्ट्रा दिए गए।
जीरो आवर की शुरुआत से पहले विपक्ष के नेता व कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने माइनिंग व स्कूल ऑफ एमिनेंस की जांच के लिए कमेटी बनाने की मांग रखी है। बाजवा ने स्पीकर कुलतार सिंह संधवां से मांग की है कि अगर सरकार के कैबिनेट मिनिस्टर और विपक्ष के नेता दोनों कमेटी की मांग कर रहे हैं तो इसे बिना झिझक बना देना चाहिए। जिस पर स्पीकर संधवां ने विचार करने का इशारा करते हुए बाजवा को शांत रहने के लिए कह दिया।
80-90% युवा वापस लौट जाते हैं नशे की ओर
प्रश्न-उत्तर राउंड में जवाब देते हुए सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने ओरल मेडिसिन के बाद डी-एडिक्शन करवाने पर भी 80-90% युवा वापस लौट कर नशे की ओर जा रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए मेंटल हेल्थ पॉलिसी को रिवाइज किया जा रहा है। इसमें योगा कम मेडिकेशन व री-हेबिलिटेट करने का प्रयास किया जा रहा है।
पंजाब में साइकेट्रिक्स की शॉर्टेज है। पंजाब में सिर्फ 35 डॉक्टर उपलब्ध हैं, लेकिन मेंटल हेल्थ पॉलिसी को जेलों से शुरू किया है। जेलों में बार-बार नशे के कारण वापस आने वालों को इससे जोड़ा गया है। इन्हें ट्रीटमेंट के साथ स्किल्ड डेवलपमेंट करवा रहे हैं। इन्हें गवर्नमेंट स्कीमों के तहत ग्रांट व लोन दिलवाया जाएगा, ताकि क्राइम से दूर किया जा सके।
20 हजार स्कूल मार्च तक होंगे वाईफाई
वहीं, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने स्पष्ट किया कि पंजाब में कोई भी सरकारी स्कूल 31 मार्च 2024 तक सिंगल या टीचर लैस नहीं रहेगा। वहीं, इस समय में सभी 20000 सरकारी स्कूल वाई-फाई से जुड़ेंगे। इतना ही नहीं, 4000 स्कूलों में अभी तक वाईफाई लग चुका है और 8000 स्कूलों में चार दीवारी का काम चल रहा है।
बीते दिन पंजाब सरकार की तरफ से पंजाब राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2023 और पंजाब माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2023 को पास किया गया है। जबकि, आज भारतीय स्टाम्प (पंजाब संशोधन) विधेयक, 2023 को पास किया जा सकता है। पिछले माह बुलाए गए सत्र को पंजाब गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित की तरफ से अवैध करार दिए जाने के बाद इन बिलों को पेश नहीं किया जा सका था।
इसके साथ ही पंजाब सरकार आज पंजाब नहर और जल निकासी विधेयक, 2023 को भी पेश कर सकती है। जिसका उद्देश्य राज्य में नहरों और जल निकासी को विनियमित और प्रबंधित करना है। इस विधेयक को राज्य कैबिनेट ने 20 नवंबर को मंजूरी दे दी थी।