आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पंजाब भर में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि के साथ राज्य की आबो-हवा खराब होनी शुरू हो गई है। लुधियाना में AQI रात के समय जहां 328 तक पहुंच गया, वहीं जालंधर में AQI का औसतन 135 दर्ज किया जा रहा है। पराली जलाने की घटनाएं बीते साल से अभी तक 43% और 2021 के मुकाबले 67% अधिक रिपोर्ट हुई हैं, जिसे एक्सपर्ट चिंताजनक बता रहे हैं।
पंजाब में अक्टूबर माह की शुरुआत के साथ ही राज्य के अधिकांश गांवों में स्मॉग की स्थिति बनी हुई है। इस सीजन में खेतों में आग लगने के मामले पिछले 2 वर्षों की तुलना में बहुत अधिक हैं। जिससे फसल अवशेषों को जलाने पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे करोड़ों रुपए के खर्च पर सवाल उठ रहे हैं।
बीते सोमवार को पंजाब में पराली जलाने के 58 मामले दर्ज किए गए। इसके साथ, इस वर्ष घटनाओं की कुल संख्या 1,027 के आंकड़े को छू गई। अब तक खेतों में आग लगने की अधिकांश घटनाएं सीमावर्ती इलाकों से रिपोर्ट की जा रही थीं।
अब मालवा क्षेत्र में किसानों ने धान की पराली जलाना शुरू कर दिया है। जिसका असर पंजाब के साथ-साथ जल्द हरियाणा और दिल्ली की हवा पर भी असर डालेगा। दिल्ली का औसतन AQI 160 तक पहुंच गया है, जबकि मध्य रात्रि अधिकतर AQI 342 दर्ज किया गया।
दो साल में 67% मामलों में वृद्धि
पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) के आंकड़ों के अनुसार, 9 अक्टूबर को राज्य में 58 जगह पराली जलाने की घटनाओं को रिपोर्ट किया गया था। जबकि 2021 में 9 अक्टूबर के दिन, 114 सक्रिय आग की घटनाओं को कैद किया गया और 2022 में ऐसे 3 मामले थे।
चिंताजनक बात यह है कि इस वर्ष की कुल संख्या 1,027 पिछले दो वर्षों के संबंधित आंकड़ों से कहीं अधिक है। 2022 में 9 अक्टूबर तक 714 और 2021 में 14 घटनाएं दर्ज की गईं। अब तक के मामले पिछले साल की तुलना में 43.8% अधिक और 2021 के आंकड़े से 67% अधिक हैं। कुल मिलाकर, 2022 में 49,900 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2021 में 71304, 2020 में 76,590 और 2019 में 52991 खेतों में पराली जलाई गई थी।
अभी और बिगड़ेगी स्थिति
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में अभी स्थिति और बिगड़गी। हवा में प्रदूषण का स्तर और बढ़ेगा। दरअसल, अब मालवा के इलाकों में कटाई का काम शुरू हो गया है। यहां पराली जलाने की घटनाओं के साथ प्रदूषण का स्तर और बिगड़ने लगेगा।