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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 18 वर्षीय नीट छात्रा ऋतु शर्मा की मौत के मामले में सामने आए आठ पन्नों के सुसाइड नोट ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नोट में छात्रा ने लिखा था कि वह पिछले करीब दो वर्षों से अनचाहे विचारों और बार-बार एक ही काम दोहराने की मजबूरी से परेशान थी। पढ़ाई के दौरान एक ही चैप्टर कई बार पढ़ने के बावजूद उसे लगता था कि वह ठीक से समझ नहीं पाई है। दोबारा न पढ़ने पर उसके मन में कुछ गलत हो जाने या परीक्षा में असफल होने का डर बना रहता था।
रिपोर्ट के अनुसार, ऋतु ने अपने नोट में ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) जैसी समस्या का जिक्र किया था। उसने लिखा कि उसके दिमाग में लगातार परेशान करने वाले विचार आते थे और वह सामान्य तरीके से पढ़ाई नहीं कर पा रही थी। शुरुआत में वह इन अनुभवों को सामान्य चिंता समझती रही, लेकिन बाद में इंटरनेट पर ओसीडी के लक्षणों के बारे में पढ़ने के बाद उसे अपने अनुभव उनसे मिलते-जुलते लगे।
परिजनों के मुताबिक, ऋतु नीट की तैयारी कर रही थी। काउंसलिंग के शुरुआती दो चरणों में सीट नहीं मिलने के बाद तीसरे चरण में उसे सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट आवंटित हुई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
डॉक्टरों के मुताबिक, ओसीडी का इलाज संभव है ओसीडी को केवल आदत या बार-बार सोचने की प्रवृत्ति समझना सही नहीं है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार अनचाहे विचार आ सकते हैं और उनसे पैदा होने वाली बेचैनी कम करने के लिए वह कुछ काम दोहराने या बार-बार जांचने के लिए मजबूर महसूस कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मनोचिकित्सकीय परामर्श, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी और जरूरत के अनुसार दवाओं से इसका उपचार किया जा सकता है। समय पर पहचान और इलाज से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों को अकेले संघर्ष करने के बजाय परिवार, भरोसेमंद व्यक्ति या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेनी चाहिए। आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है और समय पर सहायता जीवन बचा सकती है।
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