सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क– इंटीग्रेटेड ट्रेड .. न्यूज़ भोपाल: स्वामी विवेकानंद जी की 161 वीं जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में मैनिट परिसर में तूर्यनाद समिति द्वारा “विवेकोत्सव’24” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विवेकानन्द के ओजस्वी व्यक्तित्व का स्मरण करते हुए एवं ऊर्जापूर्ण वातावरण में युवाओं की सहभागिता के साथ मैनिट प्रांगण (पोर्च) में प्रातः 6:30 बजे से सामूहिक योगाभ्यास के दौरान वरिष्ठ प्राध्यापिका सविता दीक्षित और रोमिला चानू मैम ने स्वामी विवेकानन्द के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की।
तत्पश्चात लगभग 500 विद्यार्थियों ने सामूहिक योग में हिस्सा लिया। अंत में सविता दीक्षित ने विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानन्द के जीवन से मानसिक एवम् शारीरिक विकास के महत्व को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी एवं नित योग करने के महत्व को समझाया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी की शुरुआत अपराह्न 4:00 बजे से सिविल सभागार में विषय इंजीनियरिंग की रामकथा अद्भुत व्याख्यान के साथ हुई। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष तथा उन्मुख विचारधारक उमाशंकर पचौरी सम्मिलित हुए। उनका भारतीय शिक्षा में भारतीयता लाने का संघर्ष आदर्श है, जो शिक्षा को सिर्फ ज्ञानाधारित नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों से भी जोड़ने की कोशिश करता है।
वे हिन्दी भाषा के प्रति अपने गहरे ज्ञान और समर्पण के लिए प्रसिद्ध हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया प्रौद्योगिकी की एक भूल की वजह से रामचंद्र के वनवास की संपूर्ण भूमिका बनी और इस प्रकार राम कथा का जन्म हुआ तथा रामसेतु को भारतीय इंजीनियरिंग का इतिहास बताया। अंत में विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए गणेश जी को पौराणिक काल का कंप्युटर एवं उनके वाहन मूषक को आधुनिक समय का माउस बताया। “शुद्ध बारिश का पानी जब तक शुद्ध माटी से नहीं मिलता तब तक वे दोनों शुद्ध हैं अन्यथा कीचड़ का निर्माण होता हैं”, उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं तकनीकी को जोड़ते हुए हमे सफल युवा बनाने की प्रेरणा दी। इसी के साथ उन्होंने अपने शब्दों को विराम दिया।
तत्पश्चात सायं 6:00 बजे से मैनिट पोर्च पर विद्यार्थियों ने 161 आकाशदीप प्रज्ज्वलित कर पवित्रता, शांति और शालीनता की ओर अग्रसर होने का संदेश दिया एवं स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े संकल्पों को दोहराया साथ ही समिति के सदस्यों ने विवेकोत्सव के अवसर पर भारत की श्रृंखला का निर्माण 1161 कांच के गिलास एवम् पलाश के पत्तों का प्रयोग करते हुए किया तथा दीप प्रज्ज्वलित कर भारत के रेखाचित्र को दीप्तिमान किया। तत्पश्चात स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से जुड़े 161 छायाचित्रों के माध्यम से विवेकोत्सव की शिरोरेखा को सुशोभित किया।