सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पाकिस्तान की केयरटेकर सरकार के विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने बुधवार को कहा कि साउथ एशिया में शांति तभी हो पाएगी जब जम्मू-कश्मीर मसले का हल UNSC के प्रस्तावों और कश्मीरियों की इच्छा के तहत निकाला जाएगा। बुधवार को ब्राजील की राजधानी ब्रुसेल्स में मौजूद पाकिस्तानी दूतावास में कश्मीर एकजुटता दिवस मनाया गया।
इस दौरान एक प्रदर्शनी के तहत जम्मू-कश्मीर में भारत से उत्पीड़ित लोगों की दुर्दशा को दिखाया गया। विदेश मंत्री ने कहा- जम्मू-कश्मीर को भारत जबरदस्ती कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यहां के बेटों और बेटियों ने पूरी बहादुरी से इसका विरोध किया।
जिलानी बोले- भारत कश्मीरियों की इच्छा दबाने में नाकाम रहा
जिलानी ने आगे कहा- भारत ने जम्मू-कश्मीर पर अवैध तरह से कब्जा कर रखा है। आज हम उन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने कश्मीर के हित के लिए भारत के अत्याचार के सामने अपनी जान गंवा दी। भारत कश्मीरी लोगों की इच्छा को दबाने में नाकाम रहा है और उनके बलिदानों को इतिहास में याद रखा जाएगा।
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वो सामने आकर जम्मू-कश्मीर में भारत की तरफ से हो रहे मानवीय अधिकारों के उल्लंघन का विरोध करे। जिससे कश्मीर में भारत सरकार के 5 अगस्त 2019 के फैसले को पलटकर आर्टिकल 370 को फिर से लागू किया जा सके।
केयरटेकर PM ने कहा था- कश्मीर हमारी नसों में
इससे पहले 14 दिसंबर को पाकिस्तान के केयरटेकर PM अनवार-उल-हक काकड़ ने भी कहा था कि आर्टिकल 370 पर भारत के सुप्रीम कोर्ट का फैसला राजनीति से प्रेरित है। हम कश्मीर के लोगों के लिए नैतिक, राजनीतिक और डिप्लोमैटिक सपोर्ट जारी रखेंगे। घरेलू कानून और न्यायिक फैसलों के जरिए भारत अपने फर्ज से छुटकारा नहीं पा सकता।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में लेजिस्लेटिव असेंबली के स्पेशल सेशन को संबोधित करते हुए काकड़ ने कहा था- कश्मीर पाकिस्तान की नसों में हैं। पाकिस्तान शब्द ही कश्मीर के बिना अधूरा है। पाकिस्तान और कश्मीर के लोगों में एक खास रिश्ता है। राजनीति से अलग हटकर पूरा पाकिस्तान इस बात का समर्थन करता है कि कश्मीरियों के पास अपने फैसले लेने का हक है।
सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखा
दरअसल, 11 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सरकार के फैसले को बरकरार रखा था। SC ने कहा था कि आर्टिकल 370 अस्थायी था। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। राष्ट्रपति को यहां के फैसले लेने का पूरा अधिकार है। इसके साथ ही राज्य में सितंबर 2024 तक चुनाव कराने का आदेश भी दिया गया है।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया था। साथ ही राज्य को 2 हिस्सों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 23 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। 5 जजों की बेंच ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की थी।