आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ब्रिटिश काल के दौर से चले आ रहे इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह बनाई गई भारतीय न्याय संहिता (BNS) इसी महीने गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी से पहले लागू करने की तैयारी है।

अधिसूचना जारी होने के साथ ही कम गंभीर अपराधों के तहत जेल में बंद करीब 82 हजार कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इनके होली से पहले जेल से बाहर आने की संभावना है।

गृह मंत्रालय के सीनियर अधिकारी का कहना है कि अंडर ट्रायल कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू करने के लिए ट्रेनर जेल अधिकारियों, पुलिस बल और वकीलों को ट्रेनिंग देंगे। 3000 ट्रेनरों की ट्रेनिंग हो चुकी है। अब ये ही बाकी लोगों को नए कानून के हिसाब से ट्रेंड करेंगे।

जिन कैदियों के पास जमानत के पैसे नहीं होंगे, उनके लिए सरकार ने विशेष फंड की व्यवस्था की है। केंद्र और राज्य सरकार ऐसे कैदियों की जमानत राशि जमा कराएंगी।

जेलों में आधे कैदी गैर संगीन अपराध के

गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि देश की जेलों में साढ़े पांच लाख कैदी हैं। कैदियों की कुल संख्या में करीब आधे गैर संगीन अपराधों के कैदी हैं।

गैर संगीन अपराध के अंडर ट्रायल वालों की संख्या 2 लाख है। इनमें ज्यादातर तो अधिकतम सजा से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं।

कितने कैदी कहां

राज्य   कैदी

उ. प्रदेश 1,21,609

बिहार   64,914

मध्य प्रदेश     48,857

पंजाब   30,801

हरियाणा 25,471

राजस्थान      24,659

छत्तीसगढ़      20,451

झारखंड 19,415

गुजरात 16,611

ऑनलाइन सुनवाई होगी, इससे पुलिस का समय बचेगा

जमानत और रिहाई के लिए अंडर ट्रायल कैदियों को खुद अदालत नहीं जाना पड़ेगा। वे जेल से ही ऑनलाइन अदालत से रूबरू होंगे। जमानत मिलते ही रिहा कर दिए जाएंगे।

गृह मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि अभी तक जमानत के लिए पेशी और जमानत न मिलने पर फिर जेल ले जाने की प्रक्रिया में दिनभर पुलिस जवान लगे रहते थे। अब पुलिस बल को दूसरे काम करने का समय मिल सकेगा।

नए क्रिमिनल जस्टिस कानून 26 जनवरी से पहले नोटिफाई होंगे: एक साल में पूरे देश में लागू कर दिए जाएंगे

तीन नए क्रिमिनल जस्टिस कानून भारतीय न्याय संहिता (‌BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की अधिसूचना 26 जनवरी तक जारी कर दी जाएगी।

एक सरकारी अधिकारी ने 2 जनवरी को कहा कि इन कानूनों को एक साल के भीतर पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। अधिसूचित हो जाने पर नए कानूनों के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं।