सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हो सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राजनीति में परिवारवाद की आलोचना पर बिहार में हंगामा मच गया है। RJD और JDU में तल्खी बढ़ने लगी है। इस बीच, RJD सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने नीतीश कुमार का नाम लिए बिना जवाब दिया है।

रोहिणी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक के बाद एक तीन पोस्ट किए। लिखा- समाजवादी पुरोधा होने का करता वही दावा है, हवाओं की तरह जिसकी बदलती विचारधारा है। मामला बढ़ा तो रोहिणी ने सभी पोस्ट डिलीट कर दिए।

इस बीच, खबर ये भी है कि भाजपा ने अपने सभी विधायकों को पटना बुलाया है। 4 फरवरी को झारखंड के रामगढ़ में सीएम नीतीश कुमार की रैली कैंसिल हो गई है।

परिवारवाद पर सीएम नीतीश कुमार ने 24 जनवरी यह कहा था

‘आजकल तो लोग अपने परिवार को ही आगे बढ़ाते हैं, लेकिन कर्पूरी जी ने कभी नहीं बढ़ाया। जननायक से सीखकर हमने भी कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया। कर्पूरी जी के जाने के बाद हमने उनके बेटे रामनाथ ठाकुर को आगे बढ़ाया। कौन क्या बोलता है, बोलता रहे।’

रोहिणी ने X पर तीन पोस्ट लिखे-

बिहार सरकार में सबकुछ ठीक नहीं…कैबिनेट बैठक में तल्खी दिखी

महागठबंधन में तल्खी का असर नीतीश कैबिनेट की बैठक में भी दिखी। गुरुवार 25 जनवरी को बैठक महज 15 मिनट में खत्म हो गई। मंत्री और अफसर नाश्ता भी खत्म नहीं कर पाए थे। मंत्री भारी मन से बाहर निकले। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लिफ्ट से गए तो डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सचिवालय की सीढ़ी से नीचे उतरे।

यही नहीं, तेजस्वी लिफ्ट के बगल में नीतीश कुमार का इंतजार करते दिखे। उनके साथ मंत्री अशोक चौधरी भी थे। सीएम नीतीश कुमार ने दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन किया और बिना बोले आगे बढ़ गए।

संभवत: यह पहली बार है कि इतने कम समय में कैबिनेट की बैठक खत्म हुई है। प्रेस ब्रीफिंग भी रद्द कर दी गई। हालांकि, इसकी कोई वजह नहीं बताई गई।

जानिए, बिहार में राजनीति में परिवारवाद

लालू परिवार: आरजेडी में लंबे समय से राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव बने हुए हैं। उन्होंने चारा मामले में जेल जाते समय पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनवाया।

अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव को चुना और डिप्टी सीएम बनवाया। बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को भी मंत्री बनवाया। बेटी मीसा भारती को दो बार पाटलिपुत्र सीट से लोकसभा का टिकट दिया। वे हारीं तो दो बार उन्हें राज्यसभा भेजा। साले साधु यादव और सुभाष यादव को भी राजनीति में आगे बढ़ाया। अब सालों से संबंधों में खटास है।

पासवान परिवार: दिवंगत रामविलास पासवान ने अपने दोनों भाइयों पशुपति पारस और रामचंद्र पासवान को राजनीति में खूब आगे बढ़ाया। रामविलास के निधन के बाद उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) दो फाड़ हो गई।

एक के सुप्रीमो भाई पशुपति पारस हैं तो दूसरे धड़े की कमान बेटे चिराग पासवान के हाथ है।

जीतनराम मांझी: पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी भी इसी राह पर चले। उनका बेटा संतोष कुमार सुमन बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया। अभी संतोष हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (हम) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जीतनराम मांझी की समधन भी विधायक हैं।