आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों पर मंगलवार सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू हो चुकी है। राज्य में सुबह 11 बजे तक करीब 26.43% मतदान हो चुका है। राजधानी आइजोल में अब तक 21.58% वोटिंग हो चुकी है। नाथियल में सबसे ज्यादा 35.60% मतदान हुआ।
गर्वनर हरि बाबू कंभमपति ने आइजोल साउथ में सुबह 8:15 बजे वोटिंग की। मुख्यमंत्री जोरमथंगा सुबह 7 बजे के करीब वोट डालने आए थे मगर EVM मशीन में खराबी के चलते लौट गए। चार घंटे बाद वापस आकर उन्होंने वोट डाला
वहीं, मिजोरम कांग्रेस के अध्यक्ष लालसावता ने दावा किया कि मिजोरम में हम पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रहे हैं। हम 22 सीट जीतने जा रहे हैं। जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के कार्यकारी अध्यक्ष और आइजोल नॉर्थ-III से पार्टी के उम्मीदवार के सपडांगा ने आज सुबह अपना वोट डाला।
मिजोरम चुनाव की तस्वीरें…
सेंट्रल आर्म्ड फोर्स की 50 कंपनियां तैनात
स्टेट इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, राज्य में 1,276 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 30 केंद्र संवेदनशील हैं। सुरक्षा के लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की 50 कंपनियां तैनात की गई हैं। राज्य की थोरांग सीट पर सबसे कम 14 हजार 924 वोटर हैं, जबकि तुइचावंग सीट पर सबसे ज्यादा 36 हजार 41 वोटर हैं।
कुल 174 उम्मीदवार मैदान में
मिजोरम में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (MNF), जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) और कांग्रेस के बीच है। इस बार कुल 174 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) और कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं जबकि BJP सिर्फ 21 और 73 निर्दलीय या अन्य दलों के प्रत्याशी हैं। 2018 में कांग्रेस को हराकर MNF ने 10 साल बाद सत्ता हासिल की थी।
मिजोरम चुनाव के 4 समीकरण…
- मिजो नेशनल फ्रंट, कांग्रेस और जोरम पीपुल्स मूवमेंट के बीच त्रिकोणीय मुकाबला
मिजोरम विधानसभा चुनाव में भाजपा का वर्चस्व ज्यादा नहीं रहा। यहां सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF), जोरम पीपुल्स मूवमेंट और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला रहता है। 2018 में कांग्रेस को हराकर MNF ने 10 साल बाद सत्ता हासिल की थी। सबसे बड़ा उलटफेर था कि कांग्रेस तीसरे नंबर पर आ गई और विपक्ष की भूमिका जोरम पीपल्स मूवमेंट के पास चली गई है। वहीं भाजपा को पिछले चुनाव में सिर्फ एक सीट मिली थी।
- मिजोरम के CM केंद्र में NDA के साथ हैं, लेकिन राज्य में अलग
CM जोरमथंगा की पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) भाजपा के नेतृत्व वाली नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) और केंद्र में सत्ताधारी NDA में शामिल है। हालांकि, MNF मिजोरम में भाजपा से अलग है। लोकसभा में MNF से एकमात्र सांसद लालरोसांगा हैं। वहीं राज्यसभा में भी MNF का एक ही सांसद हैं और उनका नाम के वनलालवेना है। वैसे तो यह पार्टी NDA के साथ रहती, मगर मणिपुर हिंसा को लेकर MNF की केंद्र सरकार से नाराजगी है।
- मिजोरम में ईसाई वोटर्स सबसे अहम, CM का मोदी के साथ स्टेज शेयर करने से इनकार
मिजोरम में इस बार BJP और MNF अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। मणिपुर हिंसा की आंच मिजोरम तक फैली हुई है। CM जोरमथंगा ने 24 अक्टूबर को एक प्रोग्राम में कहा था, ‘मैं PM के साथ स्टेज शेयर नहीं करूंगा, क्योंकि मणिपुर में मैतेई लोगों ने चर्च जलाए। इसी वजह से हम BJP का साथ नहीं दे सकते।’
दरअसल, मिजोरम में 87 फीसदी आबादी ईसाई है। ऐसे में जोरमथंगा अपने ईसाई वोटरों का नाराज करने का रिस्क नहीं उठाना चाहते। इसके अलावा राज्य में इस बार शरणार्थी संकट से निपटना प्रमुख चुनावी मुद्दा है।