आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मिजोरम के 40 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से जारी है। ZPM ने अब तक 14 सीट जीत लीं और 13 पर आगे चल रही है।
वहीं सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को 10 सीटों पर बढ़त मिली। हालांकि CM जोरमथंगा आइजोल-ईस्ट 1 से चुनाव हार गए। उन्हें ZPM के ललथनसंगा ने हराया। उधर बीजेपी ने दो सीटें जीत ली हैं। पिछली बार पार्टी को एक सीट मिली थी। जबकि कांग्रेस 1 पर आगे है।
जोरम पीपुल्स मूवमेंट के नेता लालदुहोमा हैं। लालदुहोमा एक पूर्व IPS अधिकारी हैं। वे पूर्व PM इंदिरा गांधी की सिक्योरिटी संभाल चुके हैं। उनकी पार्टी ने दूसरी बार विधानसभा चुनाव लड़ा। 2018 में ZPM को 8 सीटें मिली थीं।
छह दलों के गठबंधन से बनी थी जोरम पीपुल्स मूवमेंट
जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी शुरुआत में छह क्षेत्रीय दलों का गठबंधन था। जिसमें मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, जोरम नेशनलिस्ट पार्टी, जोरम एक्सोडस मूवमेंट, जोरम डिसेंट्रलाइजेशन फ्रंट, जोरम रिफॉर्मेशन फ्रंट और मिजोरम पीपुल्स पार्टी शामिल थीं।
2018 में ZPM ने इसी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था और आठ सीटें जीतीं। इसके बाद चुनाव आयोग (ECI) ने आधिकारिक तौर पर जुलाई 2019 को पार्टी को रजिस्टर्ड किया। सबसे बड़ी संस्थापक पार्टी, मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, 2019 में गठबंधन से बाहर हो गई थी और बाकी बची पांच पार्टियां एक में शामिल हो गईं, जिसे ZPM नाम दिया गया।
मिजोरम की राजनीति के बड़े चेहरे…
- जोरमथंगा- मिजो नेशनल फ्रंट
जोरमथंगा सत्ताधारी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष हैं। वह 1966 में MNF से जुड़े थे। काफी सालों तक पार्टी के अंडरग्राउंड वर्कर रहने के बाद 1989 में हुए विधानसभा चुनावों में चम्फाई सीट से विधायक चुने गए। 1990 में लालडेंगा की कैंसर की वजह से मौत होने के बाद जोरमथंगा को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया।
जोरमथंगा के नेतृत्व में MNF ने 1998 में विधानसभा चुनाव जीता और वे पहली बार CM बने। 2003 में पार्टी ने फिर से सत्ता हासिल की और जोरमथंगा दोबारा मुख्यमंत्री बने। उनकी पार्टी को 2008 के चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी थी, मगर 2018 में फिर वापसी की और तीसरी बार CM बनें।
- लालसावता – कांग्रेस
मिजोरम में अगर किसी ने कांग्रेस पार्टी को मजबूत किया है तो वह पूर्व CM ललथनहवला हैं। वह 1984-86, 1989-98, 2008-18 तक मिजोरम के मुख्यमंत्री रहे। मगर 2018 में वह चुनाव हार गए और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। अब कांग्रेस की बागडोर लालसावता के हाथों में है।
लालसावता ललथनहवला सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं। यह अपनी साफ-सुथरी छवि की वजह से लोगों के बीच पॉपुलर हैं। लालसावता के कंधे पर कांग्रेस को राज्य में दोबारा मजबूत करने का जिम्मा है जो 2013 में आई 34 सीटों से घटकर 2018 के चुनावों में पांच सीटों पर सिमट गई थी।
- लालदुहोमा – जोरम पीपुल्स मूवमेंट
MNF और कांग्रेस के अलावा मिजोरम में तीसरी बड़ी पार्टी जोरम पीपुल्स मूवमेंट है और इसके नेता लालदुहोमा हैं। लालदुहोमा एक पूर्व IPS अधिकारी हैं। जो पूर्व PM इंदिरा गांधी की सिक्योरिटी संभाल चुके हैं। अभी राहुल गांधी की जब संसद सदस्यता गई थी तो लालदुहोमा एक बार फिर चर्चा में आ गए थे।
दरअसल, लालदुहोमा ने 1984 में मिजोरम से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सीट जीती थी। बाद में उनका राज्य कांग्रेस के नेताओं से मतभेद हो गया और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। वे 1988 में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले पहले लोकसभा सांसद बने। 2018 में लालदुहोमा ने आइजोल पश्चिम- I और सेरछिप से निर्दलीय चुनाव जीता।
2018 में MNF ने कांग्रेस से छीनी थी सत्ता
2018 में हुए विधानसभा चुनाव में 10 साल सत्ता में रही कांग्रेस को सरकार गंवानी पड़ी थी। पी. ललथनहवला चम्फाई साउथ और सेरछिप दोनों सीटों से चुनाव हार गए थे। कांग्रेस को मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) ने सीधे मुकाबले में हराया था। जोरमथंगा CM बने थे। तब MNF को 26, कांग्रेस को 5, भाजपा को 1 और निर्दलीय को 8 सीटें मिली थीं।
एग्जिट पोल में लालदुहोमा की पार्टी ZPM सबसे आगे
मिजोरम के 5 एग्जिट पोल में से एक में जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) को सरकार बनाते दिखाया गया है। बाकी 4 पोल में हंग असेंबली का अनुमान जताया गया है। पोल ऑफ पोल्स में सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को 15, ZPM को 16, कांग्रेस को 7 और भाजपा को 1 सीट मिलने का अनुमान है।