आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जल जीवन मिशन घोटालों के मामले में ईडी की टीम ने जलदाय विभाग के मंत्री महेश जोशी के ऑफिस और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सुबोध अग्रवाल समेत कई अधिकारियों के घर पर रेड की है। राजस्थान में 6 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की गई है। शुक्रवार सुबह हुई छापेमारी के बाद अधिकारियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।
सुबह करीब 8 बजे ईडी की तीन टीमें सचिवालय पहुंची और सुबोध अग्रवाल के ऑफिस में सर्च करना शुरू किया। सुबोध अग्रवाल राजस्थान के तीसरे सबसे सीनियर आईएएस हैं। गांधी नगर स्थित जलदाय विभाग के एक सीनियर अधिकारी के घर पर भी ईडी की टीमें सर्च कर रही हैं। पीएचईडी मंत्री महेश जोशी के सचिवालय स्थित कार्यालय में कार्रवाई हो रही है।
इनके अलावा विभाग से जुड़े चीफ इंजीनियर केडी गुप्ता, इंजीनियर दिनेश गोयल, एक्सईएन संजय अग्रवाल के ऑफिस सहित अन्य ठिकानों पर भी फिलहाल टीम सर्च कर रही है। टीम की छापेमारी की सूचना मिलने पर यह सभी सीनियर अधिकारी कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। बता दें कि करीब 2 महीने पहले भी ईडी ने जयपुर में अलग-अलग जगह रेड मारी थी। सर्च के दौरान ढाई करोड़ रुपए कैश और सोने की ईंट मिली थीं। ईडी को प्रॉपर्टी कारोबारी संजय बड़ाया और कल्याण सिंह कविया के घर से कई दस्तावेज भी मिले थे। इसके बाद सीनियर आईएएस अधिकारी (जलदाय विभाग के ACS) सुबोध अग्रवाल का नाम सामने आया था।
जमीनों के कागजात भी मिले थे
दो महीने पहले हुई रेड में कल्याण सिंह कविया के घर से ब्यूरोक्रेट्स और राजनेताओं के नामों से रजिस्टर्ड जमीनों के कागजात मिले थे। कविया जयपुर के वैशाली नगर, करणी पैलेस रोड, गांधी पथ सहित कई इलाकों में प्रॉपर्टी का बिजनेस करता है। इस आधार पर माना जा रहा था कि ईडी ऐसे अधिकारियों और राजनेताओं से पूछताछ भी कर सकती है।
बड़ाया के घर से भी मिले थे सबूत
सितंबर में जब ईडी ने संजय बड़ाया और कविया के घर रेड की थी, उस दौरान बड़ाया के घर से ईडी को कई सबूत मिलने का दावा किया गया था। दरअसल, संजय बड़ाया को यह जानकारी थी कि ईडी राजस्थान में कभी भी जल जीवन मिशन को लेकर एक्शन कर सकती है। इस पर संजय ने सबसे पहले अपना आईफोन 14 प्रो बदलकर उसकी जगह दूसरा मोबाइल ले लिया था। ईडी को बड़ाया के घर से नकदी नहीं मिली, लेकिन जो दस्तावेज मिले वो ईडी की जांच आगे बढ़ाने के लिए काफी थे। दस्तावेजों में कई अधिकारी, राजनेताओं को पैसा लेने और देने के सबूत होने का दावा किया जाता है। कुछ रजिस्ट्री के दस्तावेज भी बड़ाया के घर से ईडी को मिले थे।
पांच पॉइंट में समझें, क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?
पहला- ग्रामीण पेयजल योजना के तहत सभी ग्रामीण इलाकों में पेयजल की व्यवस्था होनी थी। जिस का खर्चा राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को 50-50 प्रतिशत करना था। इस योजना के तहत डीआई डक्टर आयरन पाइपलाइन डाली जानी थी। इस की जगह पर एचडीपीई की पाइपलाइन डाली गई।
दूसरा- पुरानी पाइप लाइन को नया बता कर पैसा लिया गया। जबकि जमीन में पाइप लाइन डाली ही नहीं गई।
तीसरा- कई किलोमीटर तक आज भी पानी की पाइप लाइन डाली ही नहीं गई है, लेकिन ठेकेदारों ने जलदाय विभाग के अधिकारियों से मिल कर उसका पैसा उठा लिया।
चौथा- ठेकेदार पदमचंद जैन हरियाणा से चोरी के पाइप लेकर आया और उसे नया पाइप बता कर बिछा दिया और सरकार से करोड़ों रुपए ले लिए।
पांचवां- ठेकेदार पदमचंद जैन ने फर्जी कंपनी के सर्टिफिकेट लगाकर टेंडर लिया, जिसकी अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी उसे टेंडर दिया गया। क्योंकि वह एक राजनेता का दोस्त था।