आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मणिपुर के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस कमांडो की संख्या बढ़ा दी गई है। इसके खिलाफ म्यांमार की सीमा से लगे मोरे शहर में आदिवासी महिलाओं का एक वर्ग बीते 3 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
आदिवासी संगठनों कुकी इंपी और कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने दावा किया है कि शहर में इंफाल घाटी से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया जा रहा है। इससे शांति भंग हो सकती है।
वहीं, राज्य में हो रही हिंसा की घटनाओं को लेकर इंटरनेट पर बैन 26 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है।
कुकी संगठन का दावा- रात को हेलिकॉप्टर से मैतेई पुलिस की तैनाती की जा रही
कुकी इंपी संगठन का दावा है कि शहर के बफर जोन में पैरामिलिट्री फोर्स और इंडियन आर्मी के जवान काफी संख्या में तैनात हैं। इसके बावजूद कुकी बहुल शहर टेंग्नौपाल जिले के मोरेह में रात को हेलिकॉप्टर से अतिरिक्त मैतेई पुलिस की तैनाती की जा रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इम्फाल पूर्वी जिले में हाल के अभियानों में हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी कुकी समुदाय को बदनाम करने के लिए की गई है। इसलिए भी हम प्रदर्शन कर रहे हैं।
वहीं, सैन्य अधिकारियों का कहना है कि असम राइफल्स के एक कमांडेंट और अन्य सुरक्षा अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों में प्रदर्शनकारियों के साथ कई बार बातचीत की, लेकिन इसका अभी तक समाधान नहीं हुआ।
पुलिस से हथियार लूटने वाले आरोपी की CBI को रिमांड मिली
दिल्ली की एक कोर्ट ने पुलिस से हथियार लूटने वाली भीड़ से संबंधित एक मामले में आरोपी को असम की अदालत में पेश करने के लिए CBI को रिमांड दे दी। स्पेशल जज सचिन गुप्ता ने जांच एजेंसी को आरोपी मोइरांगथेम आनंद सिंह (45) की ट्रांजिट पुलिस रिमांड दी है।
आनंद पर आरोप है कि 4 मई को मणिपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में हथियार लेकर घुसे 5000 लोगों में वो भी शामिल था। उसके नेतृत्व में भीड़ ने बड़ी संख्या में हथियार लूटे थे।
मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति मिली
तीन दिन पहले मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य के आदिवासी संगठनों को 27 मार्च के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति दी थी। आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह मैतेई समुदाय को ST दर्जा देने के लिए सिफारिश भेजे।
जस्टिस अहनथेम बिमोल और जस्टिस गुणेश्वर शर्मा की बेंच ने कहा था याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत यह है कि अगर उन्हें मैतेई समुदाय को ST दर्जा देने के मामले में अपनी बात कहने या आपत्ति उठाने का मौका नहीं दिया गया तो इसका विपरीत असर पड़ेगा। मणिपुर में अब तक 180 से ज्यादा की मौत, 1100 घायल
मणिपुर में पिछले 4 महीने से चल रही जातीय हिंसा में अब तक 180 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इतना ही नहीं, 5172 आगजनी के केस सामने आए, जिनमें 4786 घरों और 386 धार्मिक स्थलों को जलाने और तोड़फोड़ करने की घटनाएं शामिल हैं।
हिंसा के बाद 65 हजार से ज्यादा लोगों ने घर छोड़ा
मणिपुर में अब तक 65 हजार से अधिक लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। 6 हजार मामले दर्ज हुए हैं और 144 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। राज्य में 36 हजार सुरक्षाकर्मी और 40 IPS तैनात किए गए हैं। पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों में कुल 129 चौकियां स्थापित की गई हैं।